आओ करें तलाश कहीं ज़िन्दगी मिले।
शायद किसी शहर में कोई आदमी मिले।।
खंजर कहीं कटार कहीं हाथ में पत्थर।
मुश्किल है इस जहाँ में कहीं सादगी मिले।।
उजड़े हुए हैं गाँव तो जलते हुए शहर।
उठती नज़र जिधर भी उधर गन्दगी मिले।।
अब तो दुआ सलाम की तौबा नहीं कदर।
मुश्किल है अब खुदा को कहीं बंदगी मिले।।
बीड़ी सिगार ड्रग्स हेरोइन का है असर।
हर कौम नस्ल देश में आवारगी मिले।।
हर आदमी का खून से दामन है तर-बतर।
सड़कों पर सरेआम वो दरिंदगी मिले।।
आओ चलो बसायें अब
एक ऐसा ही न्यायप्रदेश।
आप के उत्तरप्रदेश में
इंसाफ़ियत जमीं पे नाचती मिले।।
✍ राम गुप्ता
स्वतंत्र पत्रकार व
साधारण कार्यकर्ता/प्रचारक
आम आदमी पार्टी, उत्तरप्रदेश