प्रिया कुमारी-
निःशब्द हूँ आज उस देवी के लिए,
जिस ने मुझे ये जीवन दान दिया।
करने को पूरी मेरी हर ख़्वाहिश
अपने अरमानों तक का त्याग किया।
खोकर अपना सब कुछ उसने
मुझको पूर्णतः का एहसास दिया
कैसे चुका पाऊँगी ऋण तेरा माँ,
मुझको जीवन का कण कण
तू ने ही तो दान किया।
मैंने तुझे उस रुप में भी देखा हैं,
माँ, जहाँ कोई सोच नहीं सकता।
चंद खुशियों के लिए हमारी,
मैंने तुझे कई रातें जागते देखा हैं
और देखा हैं तेरी आँखों में,
वो आंसू भी,
जो तेरे हक के न थे।