कोथावाँ प्रा०वि० का हाल, बच्चों को दूध और फल नहीं दे रहे जिम्मेदार

सत्य, निष्ठा और न्याय मेरा गाँव मेरा देश

उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती (31 जुलाई, 1880 लमही, काशी)

सत्य, निष्ठा और न्याय के पथ पर,
मैं जीवन भर चलती जाऊँ।
सादा जीवन हो उच्च विचार,
मैं महापुरुषों से ऐसी सीख लाऊँ।

आदर्श यथार्थ भरी कहानियाँ ईदगाह, पंच परमेश्वर,
मैं अपने जीवन में अपनाऊँ।

न कोई बेटी निर्मला बने, न कोई किसान होरी,
मैं दहेज ना लूँ, कसम ऐसी खाऊँ।

सबजन को दो वक्त की रोटी मिले,
ना फिर कोई कथा कफ़न जैसी लिखी जाए,
मैं सब के सपनों को साकार करूँ।

आत्मनिर्भर बनो! ईमान की जिंदगी! जियो!,
पाप की कमाई पानी में बहती जाए।

मेरा गाँव मेरा देश भ्रष्टाचार से मुक्त हो,
मैं आचरण का पालन कर औरों को पाठ पढ़ाऊँ।

शोषित नहीं, शिक्षित बनो!
विचारों से धनी बनो!, मैं जन में चेतना लाऊँ।

(मौलिक रचना)
चेतना चितेरी, प्रयागराज
31/7/2021,6:10pm