कवि राजेश पुरोहित
इस राखी पर भैया सुनो
मुझे उपहार नहीं चाहिए
बस एक मदद चाहिए
भैया दरिन्दों से बचाना
रोज पढ़ती अखबार तो
दिल दहल जाता है मेरा
दहशत के मारे डर जाती
कभी झाड़ी में फेंकते हैं
कभी गर्भ में मार देते हैं
कभी दहेज से मार देते
कभी तेजाब फेंक देते हैं
दो साल की बेटी के साथ
ये लोग दरिंदगी करते हैं
ऐसे समाचार आम हो गए
व्यक्ति का स्तर गिर गया
कब कौन चरित्रहीन होगा
भैया पता नहीं लगता है ।