चेहरा पे चेहरा अब तो न लगाइए हुज़ूर!

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

हिचकी का सबब क्या है, बताइए हुज़ूर!
परेशाँ हाले दिल को, अब सुनाइए हुज़ूर!
कब तक भरमाइएगा, बाज़ीगरी दिखा के,
चेहरा-पे चेहरा अब तो न, लगाइए हुज़ूर!
लोग आपके हक़ीक़त से, वाक़िफ़ हैं यहाँ,
रुख़ से पर्द: अब अपना, हटाइए हुज़ूर!
इस क़द्र लोग परेशाँ हैं, आप ठाट-बाट हैं,
मुखौटे को भूलकर भी न, लगाइए हुज़ूर!
आप तो इतने भूखे हैं, इंसानियत खा गये,
नीयत को ईमानदार कर, बढ़ जाइए हुज़ूर!
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २३ मई, २०२० ईसवी)