कविता :- तो फिर क्यों आ रहे हो

शिवांकित तिवारी ‘शिवा’, युवा कवि एवं लेखक,       सतना (म.प्र.), सम्पर्क:- 7509552096

मुझे क्यों आजमाने आ रहे हो,

बताओ क्या जताने आ रहे हो ।

तुम्हीं ने मुझको ठुकराया था एक दिन, 

तो फिर क्यों अब मुझे वापिस मनाने आ रहे हो ।

क्यों पिंजरें में रखा था तुमने अब तक कैद करके,

क्यों पिंजरे से मुझे अब तुम छुड़ानें आ रहे हो ।

गिराया था मुझे तुमने कभी नीचा दिखाकर,

तो फिर क्यों आज तुम ऊँचा उठाने आ रहे हो ।

तुम्हीं ने था रुलाया मुझको पहले जख़्म देकर,

तो अब क्यों जख़्म में मरहम लगाने आ रहे हो ।

तुम्हीं ने तो कहा था तुम न कोई काम के हो,

तो फिर क्यों आज मेरी उपलब्धियाँ गिनानें आ रहे हो ।

मैं मतलब से नहीं मिलता न मतलब से मेरा रिश्ता,

तुम्हीं थे मतलबी जो हाथ मुझसे फिर मिलाने आ रहे हो ।