★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
एक–
नेता आतंकी बने, बाँट रहे हैं देश।
बोल विषैले बोलते, नक़्ली दिखता वेश।।
दो–
नेता इनको मत कहो, करते हैं व्यापार।
मानवता को खा रहे, दिखें धरा पर भार।।
तीन–
घृणित कृत्य से युक्त हैं, दुर्गुण के हैं खान।
शैतानी हरकत करें, काट रहे हैं कान।।
चार–
मक्कारी रग-रग भरी, दीमक-सा है काम।
कुण्ठित-लुण्ठित दिख रहे, बोलो जय श्री राम।।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २ फ़रवरी, २०२२ ईसवी।)