प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमेनुएल मैक्रों ने आज अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन संस्थापन सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमेनुएल मैक्रों ने आज नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन में प्रथम अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन संस्थापन सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की। सम्मेलन में वर्ष 2030 तक सौर ऊर्जा के उत्पादन के लिए दस खरब डॉलर के निवेश की आवश्यकता जताई गई।

इस अवसर पर श्री मोदी ने समग्रता पर जोर दिया और दस सूत्री कार्यबिन्दु प्रस्तुत किए। इनमें सभी राष्ट्रों के लिए किफायती सौर प्रौद्योगिकी की उपलब्धता, बिजली उत्पादन में फोटोवोल्टाएक सेल से उत्पादित ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाना और नियम तथा मानक तैयार करना शामिल है। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा नीति को सतत विकास लक्ष्य हासिल करने की दिशा में योगदान करना चाहिए।

हमारी सोलर एनर्जी पॉलिसी को विकास की समग्रता से देखें ताकि एसबीजीएस की प्राप्‍ति में इसमें ज्‍यादा में ज्‍यादा योगदान मिले। हमें ऐसे सेक्रेट्रिएट को मजबूत और प्रोफेशनल बनाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने ऊर्जा क्षेत्र में सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने और सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए रियायती तथा कम जोखिम वाली पूंजी उपलब्‍ध कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे सस्ती बिजली उपलब्ध होगी और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। उन्होंने कहा कि भारत वर्ष 2022 तक 175 गीगावॉट बिजली का उत्पादन नवीनीकरणीय ऊर्जा के स्रोतों से करेगा। सौर गठबंधन के लिए भारत की प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सदस्य राष्ट्रों के लिए पांच सौ प्रशिक्षण शिविर बनाये जाएंगे और सौर प्रौद्योगिकी मिशन इस क्षेत्र में अनुसंधान और विकास का नेतृत्व करेगा।

भारत सोलर टेक्‍नोलॉजी के गेप को भरने के लिए सोलर टेक्‍नोलॉजी मिशन भी शुरू करेगा। इस मिशन का अंतर्राष्‍ट्रीय फोकस होगा और यह हमारी सारी सरकारी तकनीकी तथा शैक्षणिक संस्‍थाओं को साथ मिलाकर सोलर क्षेत्र में आर ऐंड डी प्रयासों का नेतृत्‍व करेगा।

इस अवसर पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैन्‍युअल मैक्रॉं ने कहा कि वर्ष 2030 तक सौर ऊर्जा की एक टेरावॉट क्षमता हासिल करने के लिए दस खरब डॉलर की आवश्यकता होगी। श्री मैक्रॉं ने विभिन्‍न देशों के प्रतिनिधियों से कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए वित्त और नियम कायदों से जुड़ी बाधाएं दूर करने के लिए मिलकर काम करना होगा।

हम इसमें नई ऊर्जा का संचार कर रहे हैं। आज का दिन बहुत महत्‍वपूर्ण है, जहां हम एक साथ नया संकल्‍प कर रहे हैं। इसका फायदा केवल हमारे देशों के लिए नहीं है बल्‍कि पूरी पृथ्‍वी के लिए है।