देश के युवाओ! सरकार को ललकारो

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
(प्रख्यात भाषाविद्-समीक्षक)

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय


आज देश की सरकार की उदासीन असहाय दशा-दिशा के कारण हमारा युवावर्ग हताशा, कुण्ठा, निराशा तथा अवसाद का जीवन जीने के लिए बाध्य है। ऐसा इसलिए भी कि राष्ट्रीय नेतृत्व की इच्छाशक्ति इतनी नपुंसक हो चुकी है कि पुरुषार्थ रह ही नहीं गया। देश को कई हिस्सों और ख़ानों में बाँटकर “फूट डालो और शासन करते रहो” के अतिरिक्त उसका अन्य कोई उद्देश्य भी नहीं है। भविष्य सुरक्षित करने की चाह में देश का युवावर्ग इधर-उधर भटकता फिर रहा है; उसके भविष्य को समुज्ज्वल बनाने के लिए बेईमान और विश्वासघाती सरकार के पास कोई ईमानदार योजना नहीं है।
योजना समष्टिमूलक हो; पारदर्शी हो; भेद-भाव रहित हो तथा योग्यता के आधार पर उसका ईमानदारी के साथ क्रियान्वयन् हो। पेंशन पा रहे सेवानिवृत्त कर्मीजन को पुन: सेवा में न लेकर युवा-वर्ग का भविष्य सुनिश्चित किया जाये।
देश के युवाओं को चाहिए कि वे इन्हीं बिन्दुओं पर सरकार चलानेवालों को नीचे से ऊपर और आगे से पीछे तक घेर लें।
अपनी दुर्दशा के लिए देश का युवा-वर्ग सर्वाधिक उत्तरदायी है, जो अपने भविष्य को दाँव पर लगा ‘न०मो०-न०मो०’ (नरेन्द्र मोदी) का माला जप रहे हैं। ऐसे लोग बहुत बुरी दशा को प्राप्त करेंगे, तब कहीं उनकी आँखें खुलेंगी।
युवावर्ग को ‘हिन्दू-हिन्दुत्व’, ‘दलित, पिछड़ी’ जातियों का सब्ज़बाग़ दिखाकर उनकी मति हर ली जा रही है, ताकि सभी असन्तुष्ट शिक्षित बेरोज़गार बँटे रहें और माननीयगण उल्लू सीधा करते रहें।
वास्तव में, इसी यथार्थ का प्रत्यक्षीकरण हो रहा है।