● नित्य कर्ता सृष्टि हूँ मैं, भावना की वृष्टि हूँ मैं-राजवीर सिंह मन्त्र
जबलपुर- साहित्य संगम संस्थान नई दिल्ली द्वारा शनिवार को जबलपुर की होटल दत्त रेजीडेंसी के सभागार में महाकाव्यमेध सम्मान समारोह व वार्षिकोत्सव के चतुर्थ सत्र में शाम 6 बजे से अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की संयोजिका छाया सक्सेना प्रभु जी थीं ।इसमें देश के विभिन्न प्रान्तों के कवि कवयित्रियों ने काव्य पाठ किया।
कवि सम्मेलन के मुख्य अतिथि जबलपुर के वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार इंजीनियर संजीव वर्मा सलिल ,विशिष्ट अतिथि अमरेरन्द्र नारायण जयप्रकाश पांडेय बसंत शर्मा रहे। कवि सम्मेलन का शानदार संचालन इंजीनियर विनोद नयन द्वारा किया किया।
कवि सम्मेलन में मां सरस्वती की वन्दना दीपाली पांडेय दिया ने किया। भवानीमंडी राजस्थान के कवि डॉ. राजेश कुमार शर्मा पुरोहित ने अपनी रचना -इंसानों के दिल मे बस इतना अभिमान जगा है क्यों ,तारीफें सच्ची लगती है और कमियां झूँठी लगती है।कहकर आज के लोगों का सच बयां किया। बाल कवयित्री शुभांगी शर्मा ने -नशे के कारोबार को बंद करवाइए युवा पीढ़ी को सब नशे से बचाइए। मनोज़ कुमार तिवारी छतरपुर मध्यप्रदेश ने -फूलों की तरह महको जग को सुरभित कर दो। पढ़कर वसुधेव कुटुम्बकम की भावना रखने की बात कही।राजवीर सिंह मन्त्र ने-नित्य कर्ता सृष्टि हूँ मैं,भावना की वृष्टि हूँ मैं।कविता के माध्यम से निस्वार्थ भाव से हिंदी साहित्य सेवा करने की बात कही। शायर कविराज तरुण सक्षम लखनऊ ने अपनी शायरी अंदाज में ग़ज़ल पढ़ी-आंखों में गुमशुदा है जज्बात आज फिर से,काटे से न कटेगी ये रात फिर से सुनाकर तालियां बटोरी। चक्रधर छत्तीसगढ़ के कवि रामावतार निश्छल ने-मैं तुम्हें भी मान लूँगा तुम मुझे भी मान लोगे रचना पढ़ी।
गीतकार नवीन कुमार भट्ट नीर ने -हिंदी के इस ज्ञान यज्ञ में आना बहुत जरूरी है। कहकर हिंदी का मान बढाते हुए राष्ट्र भाषा हिंदी के सम्मान में सुन्दर गीत की प्रस्तुति दी।रायसिंह निनामा गोदरा गुजरात के कवि ने -कलियुगी असर है गलती हमारी थोड़ी ही है।कवि भरतलाल अग्रवाल ने -पूंजी का ओर गरीबी का कभी मेल हो पाया है सुनाकर अमीरी गरीबी के अंतर को समझाया। वरिष्ठ कवि चंद्रपाल सिंह ने-देशभक्ति के झूंठे गीत गाकर मन को न बहलाओ अन्याय अत्याचार पर अब आवाज़ उठाओ। सामयिक कविता पढ़ी।छगनलाल गर्ग विज्ञ सिरोही राजस्थान ने नषामुक्ति पर विधाता छंद में रचना पाठ किया। नशे से जिंदगी बोझिल उजाले भूल जाता हूँ।कवयित्री छाया त्रिवेदी ने अपनी कविता में जींवन जीने का मन्त्र शक्ति और संकल्प बताया।उमा मिश्रा प्रीति ने गांव पर आधारित गीत पढ़ते हुए ग्राम्य संस्कृति का सजीव वर्णन किया। हंसते हुए किसानों के लबों का गीत। डॉ. भावना दीक्षित ज्ञान श्री ने -नर्मदा के तट पर एक नगरी है प्यारी प्यारी। कवयित्री डॉ. रानू रही ने-ठान ही लिया उसने मेरा दिल दुखाने की फिर करूँ क्यों मैं कोशिश उसे मनाने की। गायत्री ठाकुर नरसिंहपुर ने -मधुर मकरंद के जैसी सुहासित उपवन हो।
बाल कवि वीनस श्रीवास्तव ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ रचना सुनाकर समाज को बेटी बचाओ का सार्थक सन्देश दिया।