— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

चाचा झगड़ू– अरे बेटवा रगड़ू! तुम्हार फटफटिया क का होइ गा?
भतीजा रगड़ू– चाचा! इ बताव, तुम्हार उमर कित्ता होय?
झगड़ू– अरे बेटवा साठ कै पार।
रगड़ू– त एका कहा जात हय, बुढ़वा सठियाइ गवा।
झगड़ू– एका मतबल?
रगड़ू– एका मतबल इ कि बार-बार बतावै-समझावै के बादौ तुम हमका ‘बेटा-बेटवा’ गोहराये पड़े हौ। अरे! हम तुम्हार भतीजा हयँ, भतीजा।
झगड़ू– अरे बेटवा! इ सब उमिर क तकाजा हय। तुम एका भूलि जाव। हमहूँ भूलि जाबै। अब आगै से तुमका हम भतीजा कहबै। तो भतीजे! ऊ तुम्हार फटफटिया क का भवा?
रगड़ू– अरे चाचा! मत पूछौ। इ जब से मोदीया आइ गा हय, जियै नै देय रहा हय।
झगड़ू– अरे भतीजे! मोदी बाबू क जरा इज्जत बनाव; उतारौ नय। ऊ बड़का मनई हयँ। उनका मोदीया मत कहौ। भतीजे! सुनै हौ न, देसदरोही बोलि कै तुमका जेलन मा ठेल दैहें। जरा इज्जत से नाम ल्यो।
रगड़ू– चाचा! हमका २०० किलोमीटर दूर जाय क रहा, बाकिर साला ८० रुपिया लीटर पेटरौल बढ़ै क कारन इ साइकिल क सहारा लेबै क पड़ा हय। आज सोरह दिन होय गा। पूरा संसार मा पेटरौल-डीजल सस्ता बा; मगर अपनै देस मा पेटरौल-डीजल मा आग लगा हय। रोजै-रोजै दाम बढ़वाय जाय रहा हय, जैसा सुरसा के मुँह। ई ससुर छै साल से आम लोगन क जीयै नै देइ रहा हय। कबौ पेटरौल-डीजल, कबौ रसोई गैस, कबौ दूध-दही, तेल-पानी, सब मा महँगाई डाइन क नजर लागि बा।
झगड़ू– हाँ भतीजे! तुम्हार बात सोरह आना सच्चो बा। आच्छा इ सब छोड़ो भतीजे। कल तुम कछु बतावत रहौ। हाँ, ऊ सपनेवाली बात। ऊ का रहा। जरा दिमाग मा जोर डारै दौ। हाँ, दिमाग क ताला खुलिगा। तुम एक सपना देखै रहौ। वह मा आपुन चाचा क कवनौ पाल्टी क नेता चुनै क बात बताये रहौ।
रगड़ू– अब छोड़ौ चाचा! इ महँगाई क कारण दिमागन मा जंग चढ़ि गा। सोचै-समझै क सक्ती मा ताला जड़ि गा।
झगड़ू– भतीजे! ऊ तुम्हार सपना से हमार अरमान जवान होइ गा। चल भतीजे! आज तुमका फुरुटी पिलाय आयँ। दिमाग मा ठण्ढक पहुँच जाय।
रगड़ू– चाचा! आज मूड बेकार होइ गा।
झगड़ू– अरे बचवा! चल। अरे! चल रे।
रगड़ू– आच्छा इ हमार हाथ त छोड़ौ।
झगड़ू– भतीजे! एक और फुरूटी लै लौ। बाड़ा माजा देत हय। अरे भइया! हमार भतीजा क एक अउर पिलाव। अउर भतीजे! अउर कुछ?
रगड़ू– नै चाचा! अब पेट फुल्ल होइ गा।
झगड़ू– भतीजे! हिंहा बहुतै सान्ती हय। तुम काल्ह सपना मा कवनो नवा पाल्टी क बात बतावत रहयो। ऊ बताव भतीजे!
रगड़ू– हाँ चाचा! हम बताय रहै क तुम एक नवा पाल्टी ‘डी०एच०पी०’ क नेता चुन लिहा गयो।
झगड़ू– भतीजे! ऊह सामने देख, गरम-गरम ईमिरिती छाना जात हय। पहिले मुँह मीठा, फिर मिट्ठी-मिट्ठी बात। अरे भाई! दुइ-दुइ सौ गराम ईमिरिती एहरौ फेंकव अउर दुइ बोतल डिसटिलरियो।
रगड़ू– चाचा! हाथ धोय क आय रहै।
झगड़ू– ले बच्चा! इह धोती मा मुँह पोंछि लै। हाँ तो भतीजे! अब आपन ईसटोरी सूरू कर।
रगड़ू– हाँ चाचा! हम बतावत रहै क तुमका ‘डी०एच०पी०’ पाल्टी क नेता चुन लिहा गवा रहा।
झगड़ू– इ भतीजे! ‘डी०एच०पी०’ का होत हय?
रगड़ू– ईह का माने हय– ‘देस हिलावन पाल्टी’।
झगड़ू– तो भतीजे! ई कवनौ फेंड़ हय कि झकझोर दिहा जाय आ आम हाथू मा आइ जाय।
रगड़ू– चाचा! ई कल्पबिरिछ हय, कल्पबिरिछ। ओसे जऊन-जऊन मँगबो, सब मिलै जाय।
झगड़ू– भतीजे! कान इधर ला।
रगड़ू– हाँ बोलौ चाचा।
झगड़ू– इ बता भतीजे! वह टीबिया मा जउन सुन्दर-सुन्दर आयटम दिखाय जाय हय, उहौ मिली जाय?
रगड़ू– अरे चाचा! ऊ सब तौ कछु नाहीं; तुमका चीनी, आसटरेलियन, अमरिकन, जापानी, जरमनी, कोरिअन, रसियन– सब जगहि का नम्बर एक का आयटम मिलि जइहैं। तुम बस पराइम मनिस्टर बनि जाव। एक बात हय चाचा।
झगड़ू– उ का भतीजे?
रगड़ू– तुम नरेन्दर मोदी जस पराइम मिनिस्टर बनि जायो अऊर हमका अमित साह जस होम मनिस्टर बनाइ दिहौ।
झगड़ू– ई तौ बिचार बहुतै सुन्दर हय भतीजे; मगर तुम परि साल हरिन्दर बाबा के बंसवारिया मा कलौतिया क संगै छिनारा करत पकड़ै गयो रहौ अउर छै साल तक जेल मा चक्की पिसै रहौ। अउर फेर तुम डोलावन बाबा क डेरा मा भूसी चोरी करत समय पकड़ै गय रहौ, ओकर काट कवनो हय? ऊ सार बिपछी क नेतवन तुमका हमरै संग देखतै एक ठौ मुद्दा फोकटै मा पकड़ि लिहैं, फिर हमार का होय?
रगड़ू– अरे चाचा! सियासत के महातम तुम नै समझ सकौ। अब देखौ न, गुजरातन मा नरेन्दर मोदी कई-कई सालन तक मुखमन्तरी रहैन। उनकरै पिछू-पिछू अमित साह रहेन। अमित साह क ऊपर एकवा जज लोवा क जान से मारै क मुकदमा चला; एक मॉडल क मारै क मुकदमा चला अउर न जाने का-का। अमितवा क ‘तड़ीपार’ क सजा दिहा गवा रहा। ओकर दँतकटिया यार नरेन्दर मोदी पराइम मिनिस्टर बना और अमितवा क सौ खून माफि करि दिहेस। इहै न, एक नेतवा हय; का ओकर नाँव।
झगड़ू– राजनाथ सिंह
रगड़ू– अरे नहिं रे चाचा। हाँ, याद आवा। ओकर नाम कपिल सरमा हय। ऊ सार पहिले आम आदमी पाल्टी में रहा अउर जब नरेन्दर मोदी क करमकुण्डली उघारै लाग त ओका भारतीय जनता पाल्टी म मिलाइ क ओका बोलती बन्द कइ दिहा गा। ऊ त दिल्ली क बिधान सभा मा चिल्लाई-चिल्लाई क बतावत रहा कि नरेन्दर मोदी क कवनो सुन्दरी क साथ ‘टाँका’ भिड़त रहा, वह मा अमितौ साह क नाम लेत रहा। ईहो बतावत रहा कि ई सब मामला सुपरीम कोरट में पेस होइ चुका बा। ऊ अपनै बदै ‘वाई+’ के सुरछा माँगेस, ओका ऊहौ दिलाहि दियेस। अब ऊ सार मजै मा हय।
झगड़ू– भतीजे! ई सब अन्दर के बात तोका कइसे चलि जात हय?
रगड़ू– चाचा! ई सब ‘जरनल नालेज’ क बात हय। तुमहूँ जानि जाबौ। ई हमार सब क मोबाइल बाड़ा काम क हय चाचा। एकै गूगल मा आपन सवाल फेड कर देव, फिर देखौ, अजबै-गजबै क दुनिया। अरे चाचा! उवहि गूगल मा एक बार बतावत रहा कि अपनै परधानमन्तरी नरेन्दर भाई मोदी कउनो ‘ईरानी’ के फिट किये रहेन।
झगड़ू– ईहौ सब सियासत मा होत हय बच्चा? आच्छा, ऊ कऊन ‘ईरानी’ रही।
रगड़ू– चाचा! आजु-काल्हु हमरै बुद्धि खेतै चरत रहत हय। दिमाग मा कछू चढ़त नै। ईहै से हमार ‘इस्मीरितिया’ गड़बड़-सड़बड़ होई गा।
झगड़ू– फिर ऊ ‘ईरानी’ क साथ का-का भवा बचवा?
रगड़ू– ईह बुढ़ाई दार तुमका जवानी क चसका चढ़ि गा। एही मा जीभि लपरिया-लपरिया चटखारा मारि रहियो।
झगड़ू– आच्छा ईह सब छोड़ि दिहा अऊर तुमका अमित साह जस बनाइ लिहा। अब आगै का आपन इस्टोरी चालू कर भतीजे?
रगड़ू– ई सब एकै दिन मा नै होत चाचू। एकरै बरै, पहिले अपनै गाँव क सभासद बनौ; जीतौ त टाऊन एरिया क चेअरमैन बनौ, फिर जीतौ त बिधायक बनौ। उह पर तुम्हार बिधायकी अस जोरदारी पर रहै कि तुम्हरै पाल्टी क आल्हा कमान क आँखि मा तुम धँसि जायो, फेर तौ तुम्हार चाँदिए-चाँदी हय। तुम्हार मुखमन्तरी क लाटरी लगै मा कवनो देर नै होय।
झगड़ू– ई तौ बाड़ा माथापच्ची क काम हय भतीजे। कइसे होय इ सब भतीजे?
रगड़ू– चाचा! इ सभ हमरै ऊपर छोड़ि दौ। चाचा! इ बताव।
झगड़ू– बोल बचवा?
रगड़ू– तुम फिलम देखत हौ ना?
झगड़ू– अरे बेटा! भगवान् झूठ न बोलावै। हम त जिनगी भर रंगरेजी अउर दछिन क फिलम देखत आय रहै हयँ। ओह मा हमार पइसा वसूल होय जात हय; मजै-मजै मिलत हय; मगर बेटवा! ई सब तुम हमसे काँहे पूछत हव।
रगड़ू– चाचा! तुम अपना क कुकुर कहौ।
झगड़ू– ई कवन बात हय?
रगड़ू– चाचा! तुम कुकुर क पोंछ हौ। कई दफा कहि दिहा कि ‘बेटा’ नहीं, ‘भतीजा’ कहो; मगर..
झगड़ू– अरे बचवा! इ सभ हमार उमिर क कारन होत हय। आच्छा, अब आगे बता, ऊ फिलिमवाली बात।
रगड़ू– बस चाचा! तुम्हरै ‘बेटा’ कहतभर हमार बैटरी डाउन होय जात हय। अब आगे क बात आगू। कल होय बात।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २२ जून, २०२० ईसवी)