भारतीय न्यायदर्शन, सांख्यदर्शन व भारतीय अनुशासनपर्व के प्रणेता व कर्मयोगी; परमेश्वर दत्त शुक्ल जिन्होंने अपने जीवन को उपरोक्त मूल्यों पर जिया; ऐसे भव्यभाव से परिपूर्ण मनोरम व्यक्तित्व का देहांत विगत 24 मार्च 2022 को ग्राम इटरौर मजरा शुक्लपुरवा झिलाही, जनपद गोंडा में स्थित उनके निजी आवास पर हृदय गति रुकने से हो गया। जिसकी शोक संवेदना भारतीय मूल के विज्ञानी डॉ० एस० पी० तिवारी ने स्वीडन से दी है । इनके अनुसार, जैसे ही मैंने अपने नाना परमेश्वरदत्त शुक्ल की मृत्यु की खबर सुनी, शोकाकुल हो गया, क्योंकि उनसे मुझे अपने जीवन में अनुशासन सहित न्यायदर्शन को सीखने का अच्छा मौका मिला था। वे महाभारत के अनुशासन पर्व को याद कर रखे थे, जिसे बात-बात में उदाहरण के तौर पर प्रस्तुत किया करते थे। 102 वर्ष की आयु में इन्होंने अपने परिजन के मध्य अंतिम सांस ली। मृत्यु की खबर सुनकर अंतिम दर्शन हेतु दूर-दूर से लोग आने लगे। लोग की सुविधा हेतु पार्थिव शरीर का दो दिन बाद अंतिमसंस्कार किया गया। दिनांक 26 मार्च को सनातन रीति-रिवाज से इनके पुत्र श्री राम बहादुर शुक्ल द्वारा परिजन व अन्य लोग की मौजूदगी में अंतिम-संस्कार किया गया। ऐसे अनुशासित और कुशल व्यक्ति की मृत्यु से सम्पूर्ण समाज का एक गौरवशाली इतिहास पन्नो मे खो गया है। इस महान आत्मा के पूर्णशांति एवं पूर्णविराम हेतु ईश्वर से कामना करते है।