परिवार के सात लोगों की निर्मम हत्या करनेवाली शबनम को ‘मृत्युदण्ड’ मिलना ही चाहिए

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

अमरोहा के बावनखेड़ी गाँव की रहनेवाली शबनम ने १४-१५ अप्रैल, २००८ ई० में अपने प्रेमी सलीम-संग मिलकर अपने ही परिवार के सात सदस्यों की कुल्हाड़ी से नृशंस हत्या करने की योजना बनायी थी और सातों की हत्या में शामिल भी थी, इसके साक्ष्य उपलब्ध हो चुके थे, जिसके आधार पर उसे अमरोहा न्यायालय में सुनवाई के बाद १५ जुलाई, २०१० ई० को ‘मृत्युदण्ड’ देने का निर्णय प्रकरण से सम्बन्धित न्यायाधीश ने सुनाया था।

शबनम (हत्यारिन)

इस हत्या के पीछे शबनम का सलीम के साथ प्यार का होना; शबनम का सलीम के साथ शादी करने की इच्छा प्रकट करना; शबनम के परिवारवालों का विरोध करना; शबनम का दो माह का गर्भधारण करना मुख्य कारण रहे हैं। यही कारण था कि शबनम गर्भवती हो चुकी है, घरवालों को इसका पता न चले, इसके लिए शबनम ने १० महीने के बच्चे-सहित सात सदस्यों को दूध में बेहोशी की दवा मिलाकर पिलाये थे, तत्पश्चात् प्रेमी सलीम-संग मिलकर कुल्हाड़ी से एक-एककर सभी की हत्या कर दी थी।

सलीम (हत्यारा)

उस नरसंहार-काण्ड को एक-दूसरा रूप देने के लिए कथित प्रेमी-प्रेमिका ने लुटेरों के घर में घुसने की कहानी रच डाली थी; किन्तु कहा गया है न कि झूठ के पाँव नहीं होते; झूठ पकड़ा ही जाता है। शबनम ने चाय की पत्ती में जिस ‘सिम’ को छुपा रखी थी, उसे जब पुलिसकर्मियों ने खोज निकाला और उसके आधार पर घटना से पूर्व और बाद के जो-जो तथ्य सामने आते गये, वे चौंकानेवाले थे; अन्तत: शातिर शबनम और सलीम गिरिफ़्तार कर हवालात के हवाले किये गये थे।

पवन (जल्लाद)

स्मरणीय है कि हत्यारिन शबनम जुलाई, २०१९ ई० से रामपुर के कारागार में बन्द है। उल्लेखनीय है कि देश की स्वतन्त्रता-प्राप्ति के बाद से ऐसा पहला प्रकरण होगा, जब किसी महिला को ‘मृत्युदण्ड’ दिया जायेगा।

वर्तमान में स्थिति यह है कि उच्चतम न्यायालय के दो अधिवक्ताओं ने शबनम के पक्ष में दयायाचिका (मर्सी अपील) राष्ट्रपति के पास भेज दी है, जिसे अस्वीकार अथवा स्वीकार करना राष्ट्रपति के अधिकार-क्षेत्र का विषय है। वहीं यह भी सत्य है कि यदि राष्ट्रपति अपराधिन शबनम की ‘दयायाचिका’ स्वीकार कर लेते हैं तो अपराध की एक और कड़ी जुड़ जायेगी और आपराधिक महिलाओं का दुस्साहस द्विगुणित हो जायेगा।
उल्लेख्य यह भी है कि शबनम के प्रति उसके किसी भी स्वजन के मन में दयाभाव नहीं है। शबनम की चाची फ़ातिम तो यहाँ तक कह रही है कि सऊदी अरब में जिस तरह से कठोरतम सज़ा दी जाती है, शबनम को उसी तरह की सज़ा-ए-मौत दी जाये। दूसरी ओर, एक अन्य हत्यारा सलीम के परिवारवालों का कहना है कि अल्लाह जो करेगा, उसे मंज़ूर है।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २० फ़रवरी, २०२१ ईसवी।)