● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
हमे अच्छी तरह से जान लेना चाहिए कि दिल्ली-पुलिस केन्द्रीय गृह-मन्त्रालय के अधीन (‘आधीन’ अशुद्ध है।) है, जिसके सर्वेसर्वा गृहमन्त्री अमित शाह हैं और जिसके दल का सांसद बृजभूषण शरण सिंह मुख्य आरोपित है तथा जिसकी विरुद्ध ‘पाक्सो एक्ट’ लगाया गया है, बावुजूद वह खुला दहाड़ रहा है।
दिल्ली-पुलिस-विभाग पर ये दोनो पुलिसकर्मी कलंक’ है। पहला, जो पुलिसकर्मी मोबाइल फ़ोन से बात कर रहा है, उसका नाम धर्मेन्द्र कुमार सिंह है। बताया जाता है कि यह ए० सी० पी० है। इस अधिकारी पर ‘जन्तर-मन्तर’ मे दस दिनो से धरना-प्रदर्शन कर रहे महिला और पुरुष महिलवानों ने गालियाँ देने का आरोप लगाया है, जिसे सार्वजनिक किये जा रहे ‘वीडियो’ से सामने आ चुका है।

दूसरा चित्र उस पुलिसकर्मी का है, जिसने ‘शराब’ पीकर आन्दोलनरत महिला पहलवानो के साथ अभद्र व्यवहार किया था। इस नशाख़ोर पुलिसकर्मी को पहलवानो ने धरदबोचा था; परन्तु निरंकुश दिल्ली-पुलिसकर्मियों ने बलप्रयोग करके छुडा़ लिया था। दो पहलवानो के सिर फोड़ दिये गये थे। महिला पहलवान आक्रान्त हो चुकी थीं; अब भी हैं; बिलख रही हैं। पुलिसकर्मियों के ताण्डव के समय एक भी ‘महिला पुलिस’ नहीं दिख रही थी। यदि थी तो पुलिस उसे सार्वजनिक करे।
कल (३ मई) विलम्ब रात्रि मे शान्तिपूर्वक धरना-प्रदर्शन कर रही महिला-पुरुष पहलवानो तथा उनके समर्थकों के साथ दिल्ली-पुलिस ने जो नंगा नाच किया था, वह देश मे सत्तारूढ़ लोग के लिए बेहद शर्म की बात है।
(इस पर शीघ्र सप्रमाण-सविस्तार लिखूँगा।)
(सर्वाधिकार सुरक्षित― आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ४ मई, २०२३ ईसवी।)