ताकि सनद रहे! चुनावी भीड़-भड़क्कम में कहीं जनसरोकार न भूल बैठें नेता

क्या अन्याय पर आपकी चुप्पी और निष्क्रियता आपको अन्याय के प्रति सहमत सिद्ध नहीं करती?

भारतविश्व के विभिन्न राज्यों में घोर अन्याय व्याप्त है।
प्रथमतः मुख्य चार जनाधिकारों पर ही यहाँ हम आपका ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।
कुछ विचार कीजिए…!

1◆ देश में एक नागरिक को पूर्ण शिक्षा-प्रशिक्षण मिलता है दूसरे को नहीं, क्यों?

2◆ देश में एक परिवार को रोजगार के सभी अवसर व संसाधन (कर्म-पद-संपदा) मिले हुए हैं वहीं दूसरा दर-दर की ठोकरें खा रहा है व रोजगार माँगने पर प्रशासन की गालियाँ व लाठी-डंडे खाने को मजबूर है, क्यों?

3◆ देश में एक बस्ती/मोहल्ले को अच्छी सड़क, पीने का साफ पानी, समुचित बिजली, संचार (इंटरनेट), परिवहन एवं घर जैसी अनेकों सेवाएं-सुविधाएँ बरसों से मिल रही हैं वहीं दूसरी बस्ती-मोहल्ले को ये सब नही मिल रहा, आखिर क्यों?

4◆ देश में एक वर्ग को चिकित्सा, सुरक्षा, बीमा, बैंकिंग आश्रय व पेंशन इत्यादि संरक्षण सेवाएं मिल रही हैं वहीं दूसरे वर्गों के नागरिकों को नहीं, क्यों?

क्या उपरोक्त चारों बातों से देश की व्यवस्था में अन्याय का लक्षण सिद्ध नही हो रहा?

कृपया केवल ‘हाँ’ या ‘न’ में उत्तर दें..!

यदि आपका उत्तर हाँ है, तो बताएं की आप अन्याय की दशा को देश की व्यवस्था में क्यों स्वीकार किये बैठे हैं..?

क्यों आप छोटा चोर और बड़ा चोर में से ही किसी एक को चुनने को मजबूर हैं??

क्या अब आपके पास इन दोनों छोटे मियाँ व बड़े मियाँ टाइप के चोर पार्टियों के अलावा एक ईमानदार विकल्प के रूप में चुनने के लिए आमआदमीपार्टी व अरविंद केजरीवाल जैसे न्यायप्रिय नेता नही हैं???

बोलिये..!!!!
क्या यह चुप्पी और निष्क्रियता आपकी कायरता को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं है..?

माना की ‘अन्याय’ के विरुद्ध लड़ना ठीक नहीं है किन्तु ‘न्याय’ की प्रतिष्ठा के लिए प्रयत्न करना तो मानव होने के नाते आपका कर्त्तव्य सिद्ध ही होता है।

देश के प्रायः 95% लोग आज घनघोर अन्याय के अंधकार से ग्रस्त और त्रस्त हैं।
वे शिक्षा, रोजगार, सुविधा और संरक्षण जैसे मूलभूत जरूरत भरी सेवाओं से वंचित हैं।

आज़ादी के 75 वर्षों बाद भी यदि हमारी विभिन्न सरकारों (भाजपा/काँग्रेस/सपा/बसपा) ने जनता की मूलभूत जरूरतों को नही पूरा किया तो फिर ऐसी पार्टियों को चुनकर अपना रहनुमा बनाते ही क्यों हो?

देश की 95% आबादी को मौजूदा दिल्ली की ईमानदार आमआदमीपार्टी जैसी सरकार की तर्ज पर उनके चारों न्यायशील जनाधिकारों को वितरित करने की तुरंत आवश्यकता है..!

आइये हम सब मिलकर न्यायशील व्यवस्था के निर्माण हेतु आमआदमीपार्टी दिल्ली द्वारा अबतक लागू किया गया न्यायशील नियम नीति निर्णयों पर आधारित वो दिल्ली मॉडल जिसे सम्पूर्ण देश व दुनिया के विभिन्न देशों के रहनुमाओं द्वारा सराहा जा रहा है फिर वो चाहे दिल्ली का शिक्षा मॉडल हो, या 200 यूनिट तक बिजली व 20 हज़ार लीटर पानी मुफ़्त वाली योजना हो, या फिर दिल्ली की चिकित्सा व्यवस्था पर आधारित मोहल्ला क्लीनिक व रोड एक्सिडेंटल पालिसी हों या फिर महिलाओं को सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा हो, या फिर बड़े-बुजुर्गों को चारोधाम की आध्यात्मिक यात्रा हो, या फिर 50 से भी ज्यादा सरकारी सेवाओं व सुविधाओं की डोर स्टेप डिलीवरी हो, या दिल्ली राज्य के विभिन्न सेवादारों की शहादत पर ₹1 करोड़ की सम्मानराशि वाली योजना हो, इन सभी योजनाओं में जनोत्थान व जनविकास की भावना समाहित है।

आज़ादी के तुरंत बाद पिछले 75 सालों से यही केजरीवाल का दिल्ली मॉडल तो चाहिए था देश की जनता को, जिसे मौजूदा केंद्र की भाजपा व कांग्रेसी सरकारों ने नही दिया जनता को, सिर्फ छल, कपट, नफ़रत, मार-काट, दंगा-फ़साद, सामुदायिक वैमनुष्यता व जातिगत अलगाव व मंदिर-मस्जिद के बेफिजूल के विषयों में साधारण भोली-भाली जनता को उलझाए रखा अबतक, व निरंतर यही धूर्तता भरी कुराजनीति के अलावा कुछ नही किया गया भाजपाई व कांग्रेसियों ने अबतक।

अब ये सब बेहूदगी बंद होना चाहिए!
देश युवाओं का है, क्योंकि भारत की मौजूदा आबादी में लगभग 67% हिस्सेदारी युवापीढ़ी की है।

क्या हम आगामी जनरेशन को पढ़ने व समझने के लिए जातिगत व सामुदायिक नफ़रत भरे इतिहास के बजाय मानवजीवनविकास के सर्वश्रेष्ठ अध्याय का श्रजन कर आगामी पीढ़ियों के लिए ऐतिहासिक उदाहरण वाले निर्माण का हिस्सा नही बनना चाहते?

यदि हाँ!
तो आओ हम सब मिलकर संकल्प लें कि,

“”आमआदमीपार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आदरणीय अरविंद केजरीवाल जी द्वारा विकसित किये गए न्यायशील “दिल्ली विकास मॉडल” को जन-जन तक पहुंचाकर जनता को जागरूक व जानकार बनाएँगे””।
और
न्याय को ही राष्ट्रीय धर्म घोषित करवाएंगे, ताकि देश में पुनः महालोकतंत्र स्थापित हो सके।

🙏 (राम गुप्ता – स्वतंत्र पत्रकार)
अति साधारण कार्यकर्ता/प्रचारक
आमआदमीपार्टी, उत्तरप्रदेश