आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय का संदेश
आत्मीय मित्रमण्डल!समय का समादर करना सीखें। समय सभी को समान रूप से देखता आया है। वह प्रत्येक मनुष्य का मूल्यांकन उसके कर्मों के आधार पर करता आया है। समय कभी निष्ठुर नहीं होता; प्रत्युत मनुष्य […]
आत्मीय मित्रमण्डल!समय का समादर करना सीखें। समय सभी को समान रूप से देखता आया है। वह प्रत्येक मनुष्य का मूल्यांकन उसके कर्मों के आधार पर करता आया है। समय कभी निष्ठुर नहीं होता; प्रत्युत मनुष्य […]
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय कर्म के दो रूप हैं :– प्रथम, नकारात्मक और द्वितीय, सकारात्मक। कर्म के तीन पक्ष हैं :– प्रथम, सैद्धान्तिक; द्वितीय व्यावहारिक तथा तृतीय, सैद्धान्तिक-व्यावहारिक। ये अनुभवजन्य मेरी मान्यताएँ हैं; इन्हें […]