स्रष्टा! अब तो करो संहार

July 23, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–भ्रष्ट यहाँ का तन्त्र है, भ्रष्ट नियामक लोग।धर्म खा रहा देश को, राजा करता भोग।।दो–अधम-नराधम दिख रहा, ले चण्डाली रूप।गिरता-गिरता आ रहा, कुत्सित-कलुषित भूप।।तीन–दुखड़ा दुर्बल हो रहा, पककर पकता कान।ख़ून […]