सखी! हम काहू सो नाइ कही

February 7, 2023 0

सखी! हम काहू सो नाइ कही।जोई तुम कहेउ, वहै सब साँची,मनहद पार करी।प्रियतम पालि, दिया नहिं बारेन ,बरबसि रारि परी।।सखी! हम काहू सो नाइ कही।। जोई तुम कहेउ वहै, हम बाँची,बतरस-धार बही।सतरस पूरि कर्षिता-मुदिता,सरसति साज […]

गीत : विष आलिंगन में खुश रहना, यह मैंने चंदन से सीखा

April 25, 2022 0

डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी- सोने जैसा खरा नही हूँ । पर इतना भी बुरा नही हूँ । मुद्दों को मत मीत बनाओ , मत राई को मेरु बनाओ। मेरे घाव बहुत दुखते हैं, मत खंजर […]

सारे सपने गिर जाते हैं , पत्तों जैसे पीले होकर

April 19, 2022 0

डॉ० दिवाकर दत्त त्रिपाठ (चिकित्सक/युवा गीतकार)- कभी कभी इस उर की पीड़ा, पतझड़ जैसी हो जाती है ।रंग बिरंगी दुनिया , यह जब सेमल फूल सरीखी लगती ।कोयल की वह कूक कर्णप्रिय, कानो को तब […]

‘ग़ज़ल-गीत संगम’ का आयोजन ७ जनवरी को

January 6, 2020 0

नूतन वर्ष का सारस्वत अभिनन्दन करने के उद्देश्य से नगर की प्रतिष्ठित संस्था ‘साहित्यांजलि प्रज्योदि’ की ओर से ‘ग़ज़ल-गीत संगम’ नामक कार्यक्रम का आयोजन ७ जनवरी को मध्याह्न १२ बजे ‘सारस्वत सभागार’, ११३-ए, लूकरगंज, प्रयागराज […]

वन्दे मातरम गीत देशभक्ति जगाता है

August 10, 2018 0

राजेश कुमार शर्मा “पुरोहित” (साहित्यकार) वन्दे मातरम का अर्थ है मैं माता की वंदना करता हूँ। बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा संस्कृत बांग्ला मिश्रित भाषा मे इस गीत की रचना की थी। 1882 में उनके उपन्याद आनन्द […]