मझधार

May 19, 2026 0

मिले जो कोई भी मझधार,कहो फिर कैसे बिन पतवार,चलूँ किस डगर, बता किस नगर,न कोई ओर न कोई छोर। नचावे प्रतिदिन यह चितचोर,छोड़ कर इस दुनिया की होड़,मची है जहाँ वो अंधी दौड़,कि बस मैं […]