वृक्षराज पीपल को नमन
यह कहना मुश्किल कि पीपल के इस बड़े से पेड़ के पास मेरा फ्लैट है या मेरे फ्लैट के पास यह पीपल का पेड़ है। नजदीकी इतनी कि खिड़की खोलते ही इसकी कोमल टहनियां गाल […]
यह कहना मुश्किल कि पीपल के इस बड़े से पेड़ के पास मेरा फ्लैट है या मेरे फ्लैट के पास यह पीपल का पेड़ है। नजदीकी इतनी कि खिड़की खोलते ही इसकी कोमल टहनियां गाल […]
आज (५ जून) ‘विश्वपर्यावरण-दिवस’ है। ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय वैश्विक पर्यावरण की स्थिति अति भयावह है। हमारा पञ्चतत्त्व (पृथ्वी, जल, अग्नि, आकाश एवं वायु) विषाक्त हो चुका है। यही कारण है कि धरती की […]
रिपोर्ट – पी०डी० गुप्ता
‘मौलश्री-पौधारोपण’ (‘पौधरोपण’ और ‘वृक्षारोपण’ अशुद्ध और अनुपयुक्त हैं।) कर कृत-कृत्य (कृतार्थ; संतुष्ट; पूर्ण-काम; आप्त-काम) हुआ ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आजका ‘विश्व-पर्यावरण-दिवस/विश्वपर्यावरणदिवस/, ‘विश्वपर्यावरण-दिवस (‘विश्व पर्यावरण दिवस’ अशुद्ध है।) मेरे लिए अर्थपूर्ण रहा :– विचारस्तर पर […]