अपनी भूलें स्वीकार करो
राघवेन्द्र कुमार राघव– रिश्ते पर धूल जमी हो तोधूल उड़ा दो यारों।दुनिया में ग़म ही तो हैं खुशियों को ढूंढों यारों। सभी चढ़ें हैं वक्त के रथ परयूँ ना उम्र गुजारो।एक बार यदि ये गुजरीतो […]
राघवेन्द्र कुमार राघव– रिश्ते पर धूल जमी हो तोधूल उड़ा दो यारों।दुनिया में ग़म ही तो हैं खुशियों को ढूंढों यारों। सभी चढ़ें हैं वक्त के रथ परयूँ ना उम्र गुजारो।एक बार यदि ये गुजरीतो […]