प्रेम ही संसार को सुखी बनाता है
दूसरे से जुड़ने और उसकी महिमा में खो जाने की इच्छा ही प्रेम है।इससे ही संवेदना जागती है, सरलता और विनम्रता आती है। दूसरे को स्वीकार करवाती है यह प्रेम की तड़प।दूसरे के संपर्क से […]
दूसरे से जुड़ने और उसकी महिमा में खो जाने की इच्छा ही प्रेम है।इससे ही संवेदना जागती है, सरलता और विनम्रता आती है। दूसरे को स्वीकार करवाती है यह प्रेम की तड़प।दूसरे के संपर्क से […]