गजल : मैं ही महफ़िल में अकेला रह गया
एस.पी.सुधेश- उजड़ कर हर एक मेला रह गया अन्त में दर्शक अकेला रह गया । सुखों की चाँदनी में तुम नहा लो सीस पर कोई दुपहरी सह गया । हर शमा के साथ इक परवाना […]
एस.पी.सुधेश- उजड़ कर हर एक मेला रह गया अन्त में दर्शक अकेला रह गया । सुखों की चाँदनी में तुम नहा लो सीस पर कोई दुपहरी सह गया । हर शमा के साथ इक परवाना […]