धरती की पीड़ा

May 11, 2022 0

जगन्नाथ शुक्ल, इलाहाबाद- हे कविते! सुन लो करुण पुकार, अचला धोती दृग निज अश्रुधार। माँ हूँ मैं यह कहते दानव मानव, नित करते फिर क्यों बंटाधार ? कविते! कविते! हे! कविते , मैं देती नित […]

मातृभूमि ही इस युग की आराध्य देवी

July 26, 2020 0

डॉ॰ निर्मल पाण्डेय (व्याख्याता/इतिहासकार और लेखक) : 1921 से ही स्वतंत्रता की चाह रखने वाले योद्धा की तरह डॉ. वासुदेव शरण अग्रवाल ने भारतीय राष्ट्र की एकता और नैतिकता को प्रभावित करने वाले हर सूत्र […]

हे! मातृशक्ति है नमन तुम्हें

November 7, 2017 0

 जगन्नाथ शुक्ल, इलाहाबाद (उ०प्र०) हे! मातृशक्ति है नमन तुम्हें, ये मेरा जीवन है दान तुम्हारा। है शत् शत् वन्दन मातु तुम्हें, स्नेह,कान्ति और मान तुम्हारा। हे!सहनशक्ति की प्रतिमूर्ति मातु, अद्भुत शक्ति सम्मान हमारा। जीवनदर्शन की […]