प्रत्येक विकास खण्ड के एक ग्राम मे प्लास्टिक मैनेजमेंट यूनिट बनाने पर बनी सहमति

October 17, 2022 0

आज कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह की अध्यक्षता व जिला पंचायत राज अधिकारी के संयोजन में जिला स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की बैठक हुई। समिति में ब्लॉक सुरक्षा समिति को सक्रिय करने पर […]

हावड़ा की 18 ग्राम पंचायतों मे प्लास्टिक  हटाने का कार्यक्रम आयोजित 

April 27, 2022 0

गंगा नदी को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त रखने के लिए पश्चिम बंगाल में हावड़ा जिले की जिला परिषद ने स्थानीय पंचायत समितियों और जीपी समुदायों के सहयोग से गंगा से सटी 18 ग्राम पंचायतों (जीपी) में प्लास्टिक  हटाने का कार्यक्रम आयोजित किया। ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन (एसएलडब्ल्यूएम) के माध्यम से ओडीएफ संधारणीयता और दृश्य स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण (एसबीएम-जी) के चरण 2 को ध्यान में रखते हुए अप्रैल 2022 के दौरान इस पहल का आयोजन किया गया। राज्य के हस्तक्षेप के अलावा, हावड़ा जिला परिषद  गंगा नदी से सटे सभी प्रखंडों और उसके अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायतों के साथ सामुदायिक सहायता संगठन- आमरा सुषमा जलप्रपात के सहयोग से पवित्र नदी को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त रखने के लिए आगे आए हैं। पहल के उद्देश्यः जैव-विविधता की बहाली जिसके द्वारा नदी के मछली, सरीसृप, डॉल्फिन और अन्य जानवरों को सुरक्षित और संरक्षित किया जाता है पानी के भीतर/जलीय इकोसिस्‍टम और जैव-विविधता का संरक्षण यह सुनिश्चित करने के लिए कि कृषि प्रयोजनों के लिए स्वच्छ जल उपलब्ध कराते हुए गंगा स्वच्छ रहे नदी की गहराई को बनाए रखते हुए नदी की नौगम्यता बढ़ाने के लिए गंगा से सटे क्षेत्रों में समुदायों की आजीविका को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख कार्यः उक्त लक्ष्यों को प्राप्त करने के प्रयास में, हावड़ा जिला परिषद ने ग्राम पंचायतों में एसएलडब्ल्यूएम और प्लास्टिक हटाने के कार्यक्रम शुरू किए हैं, बाद में हावड़ा में गंगा से सटे 3 प्रखंडों की 18 […]

“लौह और इस्पात उद्योग में प्लास्टिक अपशिष्ट उपयोग” पर मंथन

March 25, 2022 0

केंद्रीय इस्पात मंत्री, श्री राम चंद्र प्रसाद सिंह ने भारतीय इस्पात अनुसंधान और प्रौद्योगिकी मिशन (एसआरटीएमआई) द्वारा प्रस्तुत “लौह और इस्पात उद्योग में प्लास्टिक अपशिष्ट उपयोग” शीर्षक के निष्कर्षों पर विचार करने के लिए इस्पात मंत्रालय के सभी अधिकारियों की एक बैठक बुलाई। इस बारे में विस्तृत प्रस्तुति दी गई। इस्पात मंत्री ने कहा कि लोहा और इस्पात उद्योग कोक बनाने, ब्लास्ट फर्नेस आयरन बनाने, इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस इस्पात बनाने जैसी विभिन्न प्रक्रियाओं में प्लास्टिक कचरे का उपयोग बड़े पैमाने पर जा सकता है। इसके अलावा इस माध्यम से कचरे से कंचन बनाने की माननीय प्रधानमंत्री की परिकल्पना को वास्तव में साकार किया जा सकता है। चूंकि अधिकांश प्लास्टिक अपशिष्ट उद्योग द्वारा उपयोग किए जाने वाले कोयले की तुलना में उच्च ऊर्जा के अलावा कार्बन और हाइड्रोजन का एक स्रोत हैं और राख, क्षारीय मामलों आदि से मुक्त हैं, प्लास्टिक कचरे के उपयोग से उद्योग को कई तरह से मदद मिलेगी। इसमें आयातित कोयले पर निर्भरता कम करना, प्लास्टिक कचरे के कुशल और सुरक्षित निपटान की राष्ट्रीय समस्या को सुलझाने के अलावा, जीएचजी उत्सर्जन को कम करना, दक्षता में सुधार करना आदि शामिल हैं।  इस अवसर पर इस्पात एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री फग्गन सिंह कुलस्ते भी उपस्थित थे। एक बार उपयोग वाले प्लास्टिक सहित सभी प्रकार के प्लास्टिक का उपयोग लौह और इस्पात उद्योग में किया जा सकता है। दुनिया भर के कई देश जैसे जापान, यूरोप आदि इस्पात निर्माण में इस तरह के प्लास्टिक का उपयोग […]