भारत पर प्रभुता स्थापित करती ‘न्यू इण्डिया’
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय वर्ष २०१४ मे ‘भारत’ को पराधीन बनाकर, ‘न्यू इण्डिया’ की स्थापना करनेवाले प्रभुतासम्पन्न लुटेरे ‘भारत’ मे घुसपैठ कर चुके हैं। देश की औसत जनता भूखी, रूखी तथा सूखी पड़ती जा […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय वर्ष २०१४ मे ‘भारत’ को पराधीन बनाकर, ‘न्यू इण्डिया’ की स्थापना करनेवाले प्रभुतासम्पन्न लुटेरे ‘भारत’ मे घुसपैठ कर चुके हैं। देश की औसत जनता भूखी, रूखी तथा सूखी पड़ती जा […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय अन्तत:, यह सच नरेन्द्र मोदी की ज़बान पर आ ही गया :–“देश की कार्यसंस्कृति सात-आठ साल मे बदली है।” नरेन्द्र मोदी के इस कथन मे कहीं कोई असत्य का पुट […]
0 चिन्तन के आयाम 0 ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय यह विडम्बना ही है कि अद्वैतवादी सिद्धान्त और अभेदमूलक विचार की जन्मभूमि मे ही आरम्भ से भेदमूलक समाज रहा है। यहाँ सिद्धान्त और व्यवहार के […]
■ निम्नलिखित वाक्य को शुद्ध करें–(यह वाक्य निर्देशात्मक है, इसलिए यहाँ ‘निर्देशक- चिह्न’ (–) प्रयुक्त हुआ है।)वाक्य– कल रुई(रूई) की खेती होती है। सकारण उत्तर•••••••••••••••यह प्रश्न देखने में सहज लग रहा है, जबकि है नहीं। […]
एक–जीवन-जरा ज़रा जरा, पात घास औ’ फूस।उष्मा-ऊर्जा क्षरित-सी, रक्तराशि ले चूस।।दो–निर्गम निष्कासन निकष, उत्पाती बन राग।जरे देह-कंचन-सदृश, फफक उठी हो आग।।तीन–भेदी भाड़ा-भीरु भर, मतिरतिगति का खेल।कंस-वंश अवतंस रिपु, मानो हों विष-बेल।।चार–पाप पंक प्रसून पुन:, काम-क्रोध-मद-लोभ।धैर्य […]
मनुष्य ठहरी हुईं और गतिमान् मान्यताओं के साथ न्याय नहीं कर पाता है; क्योंकि गतिशीलता के ‘कु’ और ‘सु’ पक्षों से वह प्रभावित तो होता है, जबकि ‘ठहराव’ के प्रति उदासीन बना रहता है। ध्यातव्य […]
नेहरू ग्रामभारती मानित विश्वविद्यालय और केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय का संयुक्त राष्ट्रीय आयोजन ★ प्रस्तोता– राघवेन्द्र कुमार राघव (सम्पादक आईवी24, अवध रहस्य साप्ताहिक) “पैदा होने के बाद शिशु जो कुछ भी उच्चारित करता है, वह उसकी […]