पथिक! बोलो
— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय पथिक !परिचित पड़ाओं की प्रतीक्षाकब तक सहते रहोगे?अपरिचित राहें होतींतो पाँवों के छालेयों शिकायत नहीं करते।मरहम की तलाश में भटकनाकब भूल पाओगे?भिखारिन पगडण्डियों परकिसी पहचानी क़दमों की आहटजब-जब तुम्हारे कानों […]