मुजफ़्फ़रपुर ‘बालिका-गृह’ का मर्मान्तक और लोमहर्षक यौनशोषण-काण्ड!

August 4, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय भारत देश में कभी गाया जाता था, “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता:।” अब वह गायन मिथ्या सिद्ध हो चुका है; क्योंकि उसका गायन करनेवाले चरित्रवान् होते थे और अब जो उसका […]

वैलेण्टाइनोत्सव पर सटीक व्यंग्यात्मक प्रस्तुति : काहेक सोचु करै…

February 15, 2018 0

अवधेश कुमार शुक्ला (प्र. अ. जू. हा. कामीपुर) बबूल के वृक्ष पर पीली- पीली रेखावत, लटकती, झूलती, कुछ गुच्छिल, कुछ स्वतन्त्र लटकनों को देखा । देखने में आकर्षक, आलिंगन को उसी तरह मचलती लगीं, जिस […]

भारतीय न्यायाधीशगण विचार करें

December 29, 2017 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय– वास्तव में, ‘समलैंगिकता’ और ‘लिव इन रिलेशनशिप’ एक प्रकार का व्यभिचार है; एक दुष्प्रवृत्ति है; पारस्परिक सहमति के बावजूद वह एक प्रकार का अपराध है, जो अब तक की आपराधिक घटनाओं से […]

जायसी का ‘पद्मावत’ : एक अनुशीलन

November 21, 2017 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- ‘पद्मावत’ महाकाव्य भारतीय परिभाषा के अन्तर्गत नहीं आता। उसे एक बृहद् खण्ड काव्य कहा जा सकता है, जिसमें कथा की धारा सर्गों में विभाजित न होकर, अविच्छिन्न रूप में प्रवहमान है। उसे […]