राजेश कुमार शर्मा ‘पुरोहित’, साहित्यकार, भवानीमण्डी

मनुष्य जब किसी विषय पर दृढ़ निश्चय कर लेता है ,उसे हम संकल्प कहते हैं। यदि हम मानव जीवन को सुख पूर्वक जीना चाहते हैं तो हमें एक अच्छे इंसान बनने का संकल्प जरूर करना चाहिए। देश में अमन हो। बेख़ौफ़ होकर जनता अपना रोजमर्रा का काम करें। ऐसा माहौल आज बनाने की आवश्यकता है। आज हम सब देशवासियो को राष्ट्रभाव जगाने का संकल्प लेने की जरूरत हैं। साहित्य जगत से जुड़े फ़िल्म जगत से जुड़े लोगों को लेखकों संपादकों पत्रकारों को राष्ट्र भक्ति की अलख जगाने का काम करने का संकल्प लेने की जरूरत हैं। हमारी भारतीय संस्कृति कहती है कि संकल्प के साथ व्यक्ति को उन्नति की ओर बढ़ना चाहिए। आज हमारा देश विश्व मे शान्ति स्थापित हो इस ओर प्रयासरत है। संयुक्त राष्ट्र संघ की अहम बैठकों में कैसे देशों में शांति स्थापित हो इस ओर ध्यान दिया जा रहा है।
इतिहास को देखें तो हम पाएंगे कि हमारे महापुरुष कैसे संकल्प के साथ आगे बढ़े और महात्मा कहलाए। गांधी जी ने अन्यायपूर्ण व्यवस्थाओं का विपरीत परिस्थितियों में भी डटकर सामना किया और अपने लक्ष्य को प्राप्त किया। सभा समिति में किसी विषय में जब गहन विचार विमर्श किया जाता है पक्का निश्चय लिया जाता है,धार्मिक क्षेत्र में दान पुण्य और देवकार्य शुरू करने से पहले एक निश्चित मन्त्र का उच्चारण किया जाता है। अपना दृढ़ निश्चय प्रकट किया जाता है ये भी संकल्प ही होता है। परोपकार जिससे हो ऐसा संकल्प लेना चाहिए।
संकल्प मनुष्य को सही पहचान देता है। संकल्प न हो तो व्यक्ति अपने उद्देश्य से भटक जाता है। यदि हम अपने विकारों पर विजय प्राप्त करने का संकल्प कर लेते हैं तो यहीं स्वर्ग बन जायेगा। परिवार मन्दिर बन जायेगा। मन से काम क्रोध लोभ मोह मद मत्सर को छोड़ने का सबको संकल्प करना चाहिए। असीम सुख व शांति मिल जाएगी। परिवार की रौनक बढ़ जाती है। समाज मे सम्मान मिलना प्रारम्भ हो जाता है। प्रगति के द्वार खुल जाते हैं।
अध्यात्म की दृष्टि से देखें तो संकल्प विकल्प का जिस दिन अंत हो जाता है वह साधक योगी बन जाता है। संकल्प बने रहते हैं तो व्यक्ति शाश्वत शांति नहीं पा सकता है। जिस संगत में व्यक्ति रहता है वह जीवन मे वैसे ही संकल्प कर लेता है। इसलिए अच्छी संगत में बैठो। जीवन रूपी दर्पण पर चढ़ी धूल मिट्टी हटाने की सोचो। तभी मनुष्य जीवन की सार्थकता सिद्ध होगी। संकल्प ऐसा करो जो हमें उन्नति की ओर ले जाये। संकल्प से व्यक्ति विश्व विजेता बन सकता है। रामायण में बन्दर भालूओं की सेना के साथ दृढ़ संकल्पित होकर सब आगे बढ़े तो सात योजन समुद्र को भी पार कर लिया। रामसेतु का निर्माण हो गया। समुद्र में उस समय पुल बन जाना कितनी बड़ी बात है। आश्चर्य होता है न ? संकल्प से जो भी आगे बढ़ा वह सफल हुआ। ऐसे कई उदाहरण मिलेंगे जिन्होंने अभावों में रहकर भी राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च पद तक पहुँचे। इसलिए संकल्प करो देश विकसित बने। देशसेवा का संकल्प करो।