सच पूछो तो मुझे आमिर-गरीब, हकला-लंगड़ा, नशेड़ी-गंजेड़ी किसी भी खान या पठान से कोई शिकायत नहीं है। क्योंकि यह लोग वही कर रहे हैं जो उनका मजहब उन्हें सिखाता है। बस अंतर यह कि कोई खुलेआम जिहाद कर रहा है, कोई बीवी के कंधे पर बंदूक रखकर गजवा-ए-हिन्द का ख्वाब बुन रहा है। लेकिन कुल मिलाकर काम वे अपने दीन का ही कर रहे हैं।
शिकायत तो मुझे इस तथाकथित सदी के महानायक से भी नहीं है, जो सिर्फ पैसे को भगवान मानता है।
लेकिन मुझे शिकायत उन लोगों से है जो अपने पद, प्रतिष्ठा और अपने महान संगठन का नाम इन जिहादियों का पाप धोने के लिए करने देते हैं।
क्या सेना के एक पूर्व अधिकारी और कारगिल हीरो तथा ‘सेना मेडल’ प्राप्त इस महिला अधिकारी को पता नहीं है कि जिस व्यक्ति के साथ वह केबीसी के मंच पर बैठे हैं:-
- उसकी पत्नी को इस देश से डर लगता है।
- वह व्यक्ति उस देश के राष्ट्रपति की पत्नी से मिलने पर गर्व महसूस करता है जो कश्मीर मामले में पाकिस्तान का खुलकर साथ देता है।
- यह वही व्यक्ति है जो सनातन धर्म का सरेआम और बार बार मजाक उड़ाता है।
- क्या उन्हें पता नहीं कि इस फिल्म की हीरोइन अपने बच्चों का नाम “तैमूर” जैसे लुटेरे के नाम पर रखती है, जिसने सनातनियों का नरसंहार किया था?
- जिस फ़िल्म का प्रोमोशन इस फ़िल्म के माध्यम से हो रहा है उसमें सेना के अधिकारी को मंदबुद्धि दिखाया गया है। क्या सेना वह भी पैरा कमांडो जैसी विशिष्ट कोर में इस तरह के अधिकारी भर्ती होते हैं?
- यह वही व्यक्ति है जो अपने किरदार के माध्यम से कहता है कि “उसे लोगों को मारना अच्छा नहीं लगता है।” यानी सेना निर्दोष लोगों को मारती है।
- क्या भारतीय सेना में सिखों को दाढ़ी-बाल काटने पर मजबूर किया जाता है, जैसा फ़िल्म में दिखाया गया है?
- क्या उन्हें यह पता नहीं कि ‘बॉयकॉट ट्रेंड’ से डरा हुआ यह शातिर व्यक्ति सेना की छवि के सहारे अपने पुराने पाप धुलने की कोशिश करना चाहता है?
अगर यह सब जानते हुए भी इन दोनों अधिकारियों ने प्रसिद्धि और पैसे के लालच में चड्ढा खान के साथ मंच साझा किया है तो यह कश्मीर में शहीद हुए हजारों सैनिकों, सेना, सनातन धर्म और पूरे देश का अपमान है।

(विनय सिंह बैस, एयर वेटेरन)