विवेकहीन होता, देश-विदेश का समस्त मीडिया-तन्त्र!

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
(प्रख्यात भाषाविद्-समीक्षक)

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय –


देश और विदेश के समस्त ‘समाचार-चैनलवाले’ और समाचारपत्र-पत्रिकावाले “अक़्ल के अन्धे” और “बुद्धि के पैदल” हैं; अर्थात् ‘प्रिण्ट’ और ‘इलेक्ट्रानिक’ मीडिया का सारा तन्त्र “लकीर का फ़क़ीर” बना हुआ है; कैसे, समझें :—–


मीडियातन्त्र को यह नहीं मालूम कि देश का प्रधान मन्त्री और किसी भी राज्य का मुख्य मन्त्री अपने-अपने राजनीतिक दल की गतिविधियों में ‘प्रधान मन्त्री’ और ‘मुख्य मन्त्री’ के रूप में सम्मिलित नहीं हो सकता।
इसी विषय को गुजरात के विधानसभा-चुनाव के परिप्रेक्ष्य में देखना-समझना उचित होगा।
देश के प्रधान मन्त्री नरेन्द्र मोदी गुजरात में ‘भारतीय जनता पार्टी’ का चुनाव-प्रचार करने के लिए जा रहे हैं और उत्तरप्रदेश के मुख्य मन्त्री आदित्यनाथ योगी भी। वे दोनों चुनाव-प्रचार भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्त्ता, नेता अथवा पदाधिकारी के रूप में जाते हैं।ऐसे में, देश-विदेश का सारा मीडिया-तन्त्र सुना, दिखा, पढ़ा तथा समझा रहा है : प्रधान मन्त्री और उत्तरप्रदेश के मुख्य मन्त्री गुजरात में जनसभा को सम्बोधित करते हुए अमुक विचार व्यक्त कर रहे हैं।
मीडियाकर्मियों को नहीं भूलना चाहिए कि प्रधान मन्त्री देश और मुख्य मन्त्री सम्बद्ध राज्य के नागरिकों के हैं। जो व्यक्ति गुजरात में अपने दल के पक्ष में चुनाव-प्रचार कर रहा है, वह एक कार्यकर्त्ता के रूप में ‘मात्र’ नरेन्द्र मोदी है; वह आदित्यनाथ योगी ‘ही’ है।
उक्त प्रकार के पदनाम लेकर ऐसा आरम्भ से ही बताया जाता रहा है। ऐसे में, देश-विदेश के मीडिया-तन्त्र में ‘कुण्डली’ मारकर बैठे हुए, बहुत सारे डिप्लोमा-डिग्री, प्रशिक्षण तथा अतिरिक्त योग्यता अर्जित करनेवालों-वालियों के ‘विवेक’ पर प्रश्न उठने स्वाभाविक हैं।
देश-विदेश के मीडिया-तन्त्र में बहुत सारी सुख-सुविधाएँ पानेवाले लोग मेरे इस प्रश्नचिह्न को मिटाने की सामर्थ्य रखते हैं? यदि हाँ, तो सामने आयें।