‘दीपावली मंगल मिलन’ नहीं, ‘मीडिया मंगल मिलन’ कहो

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
(प्रख्यात भाषाविद्-समीक्षक)

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय


आज अपराह्न १२.३० के लगभग सत्ताधारी ‘बी०जे०पी०’ का बी०जे०पी० मुख्य कार्यालय दिल्ली में ‘दीपावली मंगल मिलन’ कार्यक्रम आयोजित किया गया था और उसमें बी०जे०पी० के प्रमुख नेता नरेन्द्र मोदी सम्बोधन कर रहे थे; परन्तु यह क्या! नरेन्द्र मोदी पार्टी-द्वारा आयोजित उक्त कार्यक्रम में मात्र ‘मीडियावालों’ को सम्बोधित करते हुए, भावनास्तर पर उन्हें अपने पक्ष में करते दिखे। जब ऐसी बात थी तब समारोह का आयोजन ‘दीपावली मंगल मिलन’ के स्थान पर ‘मीडिया मंगल मिलन’ नाम रखना चाहिए था। मीडियाकर्मियों को सम्बोधित करते समय नरेन्द्र मोदी को सुस्पष्ट कर देना चाहिए था कि वे इस समय प्रधान मन्त्री की भूमिका में नहीं, अपितु बी०जे०पी० के शीर्षस्थ नेता अथवा ‘मीडियासेवक’ के रूप में आये हैं।
ज्ञातव्य है कि जब से नरेन्द्र मोदी प्रधान मन्त्री बने हैं तब से यह परम्परा बन गयी है।
बहरहाल, यह स्वत: सुस्पष्ट हो गया कि प्रतिवर्ष इन्हीं दिनों अनेक राज्यों में चुनाव होते रहे हैं। इस दृष्टि से यह एक ‘कूटनीतिक मीडिया मिलन’ आयोजन है। नरेन्द्र मोदी और अमित शाह ने मीडियाकर्मियों को सम्बोधित किये थे और नरेन्द्र मोदी ने मीडियाकर्मियों के साथ सामूहिक चित्र भी खिंचवाये थे।
अब यहाँ प्रश्न हैं : —– हिमाचलप्रदेश और गुजरात राज्यों में चुनाव की तिथियाँ घोषित कर दी गयी हैं। ऐसे में, ‘भारतीय जनता पार्टी’ के प्रमुख नेता नरेन्द्र मोदी को ‘प्रधान मन्त्री’ के रूप में आकर मीडियावालों से स्वयं मिलने की ज़रूरत क्या थी?
सारे समाचार-चैनलवाले सुनाते-दिखाते रहे : दिवाली मिलन समारोह में पीएम मोदी, मोदी का दिवाली कार्यक्रम इत्यादिक। कल की तारीख़ में ऐसा ही सारे समाचारपत्रों में भी मुद्रित रहेगा।
अब यहाँ सारे मीडियाकर्मियों का महा अज्ञान विधिवत् लक्षित हो रहा है। समाज में व्याप्त बुराइयों को “डंके की चोट पर”, ‘हम तो पूछेंगे’, ‘सौ बात की एक बात’ ‘पाँच की पंचायत’, ‘ हल्ला बोल’, ‘जनता की अदालत’, ‘जनमन’, ‘भइया जी कहिन’ इत्यादिक के नाम से सामने लानेवालों को अपनी महा बुराई नहीं दिख पा रही है अथवा वे देखना ही नहीं चाहते?
मीडियाकर्मियो! पहले स्वयं ईमानदार बनो; कर्त्तव्यपरायण बनो फिर समाज को शिक्षित करने का साहस करो।
अब उत्तर दो :—–
‘भारतीय जनता पार्टी’ ने दिल्ली-स्थित अपने मुख्य कार्यालय में ‘दीपावली मंगल मिलन’ नाम से कार्यक्रम आयोजित किया था और कार्यक्रम के नाम पर पार्टी के प्रमुख नेता नरेन्द्र मोदी ने मात्र तुम सबको सम्बोधित किया था। ऐसे में, उक्त नाम की सार्थकता कहाँ है? तुम्हारे कार्यालयों में जो निमन्त्रणपत्र भेजे गये थे, क्या उनमें यह उल्लेख हुआ है : प्रधान मन्त्री के रूप में नरेन्द्र मोदी केवल मीडियाकर्मियों से मिलेंगे और उनके साथ ‘फ़ोटो’ भी खिंचवायेंगे?
यदि हाँ तो उस पत्र को देश की जनता देखना चाहती है; उसे सार्वजनिक करो।
जब उक्त कार्यक्रम उस दल की ओर से आयोजित था, जिसका प्रमुख नेता देश का प्रधान मन्त्री भी है तब तुम सभी ने नरेन्द्र मोदी से यह प्रश्न क्यों नहीं किया था : मोदी जी! इस समय आप पार्टी के प्रमुख नेता की भूमिका में हैं अथवा प्रधान मन्त्री की भूमिका में?
तुम सभी चैनलवालों ने नरेन्द्र मोदी को ‘पीएम’, ‘प्रधान मन्त्री’ सुनाने-दिखाने का कौन-सा संवैधानिक आधार लिया है?
और अब बी०जे०पी०-नेता नरेन्द्र मोदी के लिए :—
दीपावली तो चली गयी परन्तु आहार, बेरोज़गारी, अशिक्षा तथा शेष बुनियादी समस्याओं से देश की जनता जूझ रही है और नरेन्द्र मोदी-सहित समस्त नेताओं की प्राथमिकता-सूची में ‘हिन्दुत्व’ और ‘साम्प्रदायिक वैमनस्य’ ही रह गये हैं, जिनके कारण पिछले साढ़े तीन वर्षों में देश की ‘आन्तरिक स्थित’ अत्यन्त शोचनीय हो चुकी है; प्रत्येक व्यक्ति का आर्थिक विकास थम चुका है।
इस आयोजन का नाम ‘आत्मपरीक्षण-दिवस’ रखा जाता और वर्ष २०१४ के लोकसभा-निर्वाचन से पूर्व गला फाड़-फाड़कर नाटकीय शैली में नरेन्द मोदी ने जितने भी आश्वासन दिये थे और घोषणाएँ की थीं, उनमें से एक भी पूर्ण करने में वे अभी तक सफल नहीं क्यों नहीं हो पा रहे हैं, इस लोकहित के प्रश्न पर वे और उनके दल के प्रमुख नेता आत्म मन्थन करते।