संपूर्ण विश्‍व तीव्र परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है: राष्ट्रपति

हरियाणा के कुरूक्षेत्र में आज राष्‍ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्‍थान-एनआईटी के 18वें दीक्षांत समारोह को सम्‍बोधित करते हुए राष्‍ट्रपति ने कहा कि आज संपूर्ण विश्‍व तीव्र परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। उन्‍होंने कहा कि प्रौद्योगिकीय क्रांति के कारण नौकरियों का स्‍वरूप और लोगों की मूल आवश्‍यकताएं बदल रही हैं। राष्‍ट्रपति ने कहा कि ये परिवर्तन इंजीनियरिंग के वर्तमान तरीकों के लिए चुनौती भी है। वेतन के पैकेज की प्रवृति को शिक्षा में सफलता का मानदंड समझने पर श्रीमती मुर्मु ने कहा कि अधिक वेतन पैकेज प्राप्‍त करना एक अच्‍छी बात है लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि कम अच्‍छा वेतन पैकेज प्राप्‍त करने वाले कम योग्‍य हैं। उन्‍होंने विद्यार्थियों को कभी भी पैकेज के आधार पर अपनी सफलता  नहीं आंकने की सलाह दी। उन्‍होंने यह भी कहा कि उन्‍हें सफलता और सामाजिक दबाव के पारंपरिक भाव के आधार पर स्‍वयं को सीमित दायरे में नहीं रखना चाहिए। उन्‍हें यह तय करना होगा कि अपने जीवन में वे क्‍या बनना चाहते हैं। राष्‍ट्रपति ने उन्‍हें ऐसा करियर चुनने को कहा जो उन्‍हें संतोष और जीवन में अर्थ की भावना से एकाकार कराये। उन्‍होंने अभिभावकों से अपील की वे अपने बच्‍चों को उत्‍कृष्‍टता के लिए प्रेरित करें। उन्‍होंने कहा कि उत्‍कृष्‍टता के लिए प्रयास करते रहने से स्‍वत: उनके रास्‍ते में उपलब्धियां आयेंगी।

राष्‍ट्रपति ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि एनआईटी कुरूक्षेत्र, उत्‍तरी भारत का पहला एनआईटी है और स्‍टेट ऑफ द आर्ट उत्‍कृष्‍ठता केन्‍द्र स्‍थापित करने वाला देश में दूसरा एनआईटी है। उन्‍होंने यह भी कहा कि इस केन्‍द्र की स्‍थापना से उद्योग, आकादमिक और अनुसंधान तथा डीआरडी और बीएचईएल जैसे विकास संगठनों के साथ सहयोग बढ़ा है।