डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
देश और राज्य का संचालन वहाँ के सचिवालय के अधिकारी करते हैं ; सांसद, विधायक, प्रधानमन्त्री-मन्त्री-राज्यपाल मुख्यमन्त्री नहीं। ऐसे में, इन पदों को बनाये रखने का कहीं-कोई औचित्य नहीं है।राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति के पद भी समाप्त करना होगा। देश की संसद्, राज्य की विधानमण्डलों को ‘अनाथालय’ बना देना होगा और इनसे जुड़े सभी लोग की छुट्टी कर देनी होगी।
अनुभव के आधार पर देश में राजशाही शासन की आवश्यकता है, जिसकी यहाँ की जनता सदियों से अभ्यस्त रही है। यही कारण है कि आज़ादी के शीघ्र बाद से अब तक भारत में ‘लोकतन्त्र की प्रयोगशाला’ में राजनेताओं को रखा गया है, जिनमें से कुछ को छोड़कर, शेष ‘अकर्मण्य’ सिद्ध होते आये हैं।
इतिहास के पन्ने पलटिए– इससे पूर्व यहाँ कभी ‘लोकतन्त्र’ शासन-प्रणाली रही ही नहीं। राजा ‘प्रजा का पिता’ होता था और सर्वत्र सम्पन्नता-समृद्धि बिखरी रहती थी।
(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, इलाहाबाद; १ अगस्त, २०१८ ईसवी)