★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
देश के एक महत्त्वपूर्ण तन्त्र ने मुझसे सम्पर्क किया था और ‘अमर रहे’, ‘ज़िन्दाबाद’ आदिक परम्परागत उद्घोष से अलग हटकर उद्घोष-रचना करने के लिए आग्रह किया था, जिसे व्यापक स्तर पर लागू किया जायेगा। मैंने अपनी राष्ट्रीयता का परिचय देते हुए और सम्बद्ध सूत्रों का समादर करते हुए, निम्नांकित उद्घोष प्रेषित कर दिया है।
१- तिरंगा हमारी शान है,
भारत का अभिमान है।
(हम सबका अभिमान है।)
२- स्वाधीनता हमारी शान है,
गौरव-गर्व-अभिमान है।
३- गणतन्त्र हमारी शान है।
गौरव-गर्व-अभिमान है।
इनमें से प्रथम उद्घोष सर्वाधिक उपयुक्त है; क्योंकि हमारे क्रान्तिकारियों ने ‘तिरंगा’ को झुकने नहीं दिया था और आज भी हमारी सेना ‘तिरंगा’ की रक्षा के लिए प्राणपण (‘प्राणप्रण’ अशुद्ध शब्द है।) से सन्नद्ध है। किसी भी राष्ट्रीय उत्सव में ‘तिरंगा’ ही फ़हराया जाता है, इसलिए यही उद्घोष सर्वोत्तम है।
इस उद्घोष का नाद इस प्रकार होगा :–
प्रमुख व्यक्ति/सैनिक कहेगा–
तिरंगा हमारी शान है।
फिर सभी कहेंगे–
भारत का अभिमान है।
अथवा
(हम सबका अभिमान है।)
मैने यहाँ उसकी प्रति इसलिए सार्वजनिक कर दी है है, ताकि कोई मेरे उद्घोष का दुरुपयोग न कर सके।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १५ अगस्त, २०२१ ईसवी।)