हम आजादी की 75 वीं वर्षगाँठ मना रहे हैं। सारे देश मे जश्न सा माहौल। हमें ये आजादी बहुत कठिन राह से गुजरकर और क्रांतिकारियों द्वारा अपने प्राण न्योछावर करने के बाद हांसिल हुई है। इस आजादी की कीमत हमने अमर शहीदों के खून व देशवासियों के बलिदान से चुकाई है अंग्रेजी शासन में हमने गुलामी के दिन गुजारे जो कितने कष्टप्रद थे। अत्याचार लूट खसौट का काम अंग्रेजों ने दो सदियों तक किया। अंततः एक लंबी लड़ाई के बाद भारत 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ।
देश को आजाद कराने में सुभाषचंद्र बोस, भगत सिंह, खुदीराम बोस, चंद्रशेखर आजाद, मंगल पांडे के साथ ही महात्मा गांधी ने अहिंसा सत्याग्रह सविनय अवज्ञा आंदोलन कर हमें आजादी दिलाई।
बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपतराय विपिनचन्द्र पाल ने स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी। सन् 1600 में अंग्रेजो ने भारत में व्यापार करने के उद्देश्य से प्रवेश किया। उन्होंने व्यापार की आड़ में ईस्ट इंडिया कम्पनी की स्थापना की। 1859 को ब्रिटिश कानून के तहत भारत के शासन की बागडोर ईस्ट इंडिया कम्पनी के हाथ मे आ गई। 1908 में महान क्रांतिकारी खुदीराम बोस को फांसी की सजा दी गई। 1909 में मार्ले मिंटो एक्ट लागू हुआ जो नरम पंथियों को खुश करने की कोशिश की गई।9 जनवरी 1915 को गाँधीजी अफ्रीका से वकाकात कर भारत लौटे थे।1916 में लखनऊ में अधिवेशन हुआ जिसमें भारत के नरम दल व गरम दल के नेता मिलकर एक हो गए । 1929 में बारदोली में बल्लभ भाई पटेल के नेतृत्व में किसान आंदोलन हुआ। 27 फरवरी को चंद्रशेखर आजाक ने अल्फ्रेड पार्क में अंग्रेजो की गिरफ्तारी से बचने के लिए गोली मार ली थी। आजादी का महान क्रांतिकारी शहीद हो गया। गांधी जी 200 किलोमीटर की दांडी यात्रा और 12 मार्च 1930 को निकले। 8 लप्रेक भगतसिंह व बटुकेश्वर दत्त ने असेम्बली में बम फेंका था।जिसका उद्देश्य लोगो तक अपनी आवाज पहुंचाना था। 31 मार्च 1931 को भगत सिंह राजगुरु सुखदेव को फांसी पर लटका दिया।चौरी चौरा कांड में तीन हज़ार निर्दोष किसानों के जुलूस पर पुलिस ने गोलियां चलाई।इस प्रकार कई अमर क्रांतिकारियों ने बड़े जतन से हमें आजादी दिलाई।
उन्होंने भारत को गुलाम बना लिया। एक लंबी जंग के बाद हमें आजादी मिली। ब्रिटिश हुकूमत से हमेशा के लिए छुटकारा मिला। आजादी की पहली अंगड़ाई 1857 से शुरू हुई जिसे सैनिक विद्रोह के नाम से जाना जाता है।खूब लड़ी मर्दानी झांसी की रानी 17 जून 1858 को अंग्रेजों से लड़ती हुई वीरगति को प्राप्त हुई। 1860-61 में उड़ीसा बिहार में अकाल पड़ा था जिसमे 20 लाख लोग मरे थे। दिसम्बर 1885 में भरतीय राष्ट्रीय कॉंग्रेस की स्थापना हुई। ए ओ ह्यूम इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष बने।कॉंग्रेस का पहला अधिवेशन बम्बई में हुआ। 1942 में गांधी जी ने करो या मरो का नारा दिया। भारत के सभी लोगों को एकता के सूत्र में बांध दिया।अगस्त क्रांति के नाम से भारत के इतिहास में जाना जाता है।
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन राष्ट्रीय एवम क्षेत्रीय आह्वानों उत्तेजनाओं एवम प्रयत्नों से प्रेरित भारतीय राजनेतिक संघटनों द्वारा संचालित अहिंसावादी और सैन्यवादी आंदोलन था।
महात्मा गांधी ने कहा था आजादी एक जन्म के समान है जब तक हम पूर्ण स्वतंत्र नहीं है तब तक हम दास है । 20 वीं सदी के सबसे प्रभावशाली नेता गांधी ने कहा था हमें आधुनिकता का विरोध कर यथार्थ को पहचानना होगा। ग्राम विकास पर ध्यान केंद्रित करना होगा। तभी हम नैतिक आध्यात्मिक और शक्तिशाली भारत का निर्माण कर सकेंगे ।
आजादी से महात्मा गांधी का अर्थ केवल अंग्रेजी शासन से मुक्ति ही नहीं। भारत की गरीबी निरक्षरता छुआछूत जैसी बुराइयों व कुरीतियों से मुक्ति मानते थे । भूमि के विकेंद्रीकरण पर उन्होंने जोर दिया ताकि शोषण रुक सके सबको समता का अधिकार मिले । इसीलिए महात्मा गांधी के विचार आज भी प्रासंगिक है।
भारत की आजादी के लिए अंग्रेजों के विरुद्ध आंदोलन इतिहास में दो प्रकार से वर्णित है। एक अहिंसक आंदोलन जिसे महात्मा गांधी ने चलाकर हमें आजादी दिलाई। दूसरा सशस्त्र क्रांतिकारी आंदोलन। भारत की आज़ादी के लिए 1857 प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर 1947 तक जितनी भी कोशिश की गई आजादी का सपना संजोया उनमें महान क्रांतिकारियों व शहीदों की उपस्थिति ने भारतीयों को प्रेरणा दी। वस्तुतः भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन को स्वर्ण युग कहे तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। भारतीयों की देशभक्ति व मातृभूमि के प्रति जो भाव देखा उतना कभी भी नहीं रहा। आजादी की लड़ाई में सुभाषचन्द्र बोस ने तुम मुझे खून दो ,मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा नारा दिया। आज़ाद हिंद फौज बनाई और काफी सँघर्ष कर हमें आजादी दिलाई। स्वराज्य मेरा जन्मसिद्व अधिकार है और मैं इसे लेकर ही रहूँगा। नारा देकर बाल गंगाधर तिलक ने हमे आजादी दिलाई। भगतसिंह ने इंकलाब जिंदाबाद के नारे से भारत की धरती गुंजा दी।रामप्रसाद बिस्मिल ने सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल मे है देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है कहकर भारत की जनता में जोश भर दिया था। प्रसिद्ध शायर इकबाल ने कहा था सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तान हमारा। पण्डित जवाहरलाल नेहरू ने आराम हराम है कहकर देश की जनता को आजादी की जंग हेतु तैयार किया।ये सब ऐसे नारे थे जिन्होंने अंग्रेजों को भारत छोड़ने के लिए मजबूर किया।
इस वर्ष हमारा देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है।भारत के संस्कृति मंत्रालय ने इस वर्ष नई पहल की है।राष्ट्रगान गाएं विडीयो रिकॉर्ड करें। आओ मिलकर आजादी के 75 वें महोत्सव को मनाएं। माँ भारती के गुण गाएं। अमर शहीदों को कोटि कोटि प्रणाम कर नमन करें।

-डॉ. राजेश कुमार शर्मा ‘पुरोहित’
कवि, साहित्यकार
भवानीमंडी