लगेज कोच में बैठने पर आर.पी.एफ. ने यात्रियोंसे किया जानवरों जैसा बर्ताव

                     मानवाधिकार के आदेशों की उड़ाई जा रही धज्जियां उड़ाते हुए कछौना में आर.पी.एफ. ने हथकड़ी लगाकर पैदल परेड करवाई । माना लोगों ने कानून तोड़ा था लेकिन कानून के रखवालों ने तो इनके साथ उससे बुरा बर्ताव कर डाला । पहले तो हाथों में हथकड़ी डाली फिर पैदल स्टेशन से सीएचसी कछौना लाकर उनका डाक्टरी परीक्षण कराया। यहां तक नल पर पानी पीने के दौरान भी हथकड़ी नहीं खोली गई। मामला बालामऊ की आरपीएफ पुलिस का है, जिसने मानवाधिकारों का कैसे उल्लंघन किया इसकी बानगी तस्वीरों में साफ देखी जा सकती है।
                  शुक्रवार को दून एक्सप्रेस से यात्रा कर रहे हरदोई निवासी रंजन कुमार व रायबरेली निवासी गांव ठाकुरदीन पुरवा निवासी मनोज कुमार पुत्र रघुनाथ व आलोक कुमार पुत्र गंगा महेश निवासी हरदोई व रवि कुमार पटेल, शुशील कुमार मुन्नू तथा शनि  के अनुसार भीड़ अधिक होने के कारण लगेज कोच में अनजाने में बैठ गए । बालामऊ रेलवे स्टेशन से जुड़े सूत्रों की मानें तो एक दर्जन यात्रियों को लगेज कोच से आर.पी.एफ. द्वारा उतार कर हवालात में डाल कर धन उगाही का खेल शुरू किया गया । जिन लोगों ने निर्धारित शुल्क अदा कर दिया वह लोग चलते बने । जिनके पास फूटी कौड़ी नहीं थी उन्हें जेल की हवा खानी पड़ी । बालामऊ रेलवे पुलिस ने सातों यात्रियों को अपराधियों की तरह हथकड़ी लगाकर स्टेशन से लगभग एक किलोमीटर दूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कछौना पैदल ले जाकर डाक्टरी के बाद पैदल ही हथकड़ी लगे हुए खूंख्वार अपराधियों की तरह जुलूस की शक्ल में वापस लाकर हवालात में ठूंस दिया । उक्त प्रकरण के बाबत आर.पी.एफ. थानाध्यक्ष राम गोपाल सिंह ने बताया कि नियमानुसार डाक्टरी को भेजे जाते समय एक व्यक्ति के साथ तीन सिपाही जाने चाहिये। लेकिन स्टाफ कम होने के कारण हथकड़ी लगाकर भेजना पड़ता है । उनके यहाँ 22 जवानों का स्टाफ है जिसमें तीन अनुपस्थित चल रहे हैं । तीन अवकाश पर हैं व चार की बाहर डि्यूटी है । शेष से ही चेकिंग आदि का काम लेना है । यह भी बताया कि आर पी एफ रेलवे पोस्ट ने मामले की जांच के आदेश दिए है । जिससे विभाग में हड़कंप मचा है खास बात यह है कि सर्वोच्च न्यायालय व मानवाधिकार के नियमानुसार हथकड़ी नहीं लगाई जा सकती है । जानकारों की माने तो खूंख्वार अपराधियो  को ही हथकड़ी लगाई जा सकती है । कारण कुछ भी हो बालामऊ रेलवे पुलिस का कानून अलग जान पड़ता है।