लाखों पौधों का कागजी पौधरोपण, ज़मीनी हकीक़त कुछ और

जमीन से पौधे हो गये गायब, जिम्मेदार विभागों की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल

कछौना, हरदोई। पर्यावरण संरक्षण के नाम पर हर वर्ष लाखों रूपये पानी की तरह बर्बाद किए जा रहे हैं, परंतु जमीनी स्तर पर लगाये गये पौधे देखरेख के अभाव में खत्म हो गये हैं। पौधे लगाने पर अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, संस्थानों के जिम्मेदारों ने फोटो खिंचवा कर फील गुड करा लिया है, लेकिन बाद में किसी ने पौधों की सुध लेना मुनासिब नहीं समझा।

लाखों पौधे विभिन्न संस्थानों/स्थानों पर विभागों द्वारा लगाए गए हैं। प्रत्येक ग्राम सभा में हजारों पौधे रोपित किए गए। जिसमें मनरेगा द्वारा गड्ढा खुदवाये गए, वन विभाग द्वारा पौधे उपलब्ध कराए गए, परंतु उचित देखभाल के अभाव में और बिना ट्री-गार्ड के पौधों को छुट्टा जानवर चर गए, वहीं अधिकांश पौधे सूख गए। क्षेत्र में पौधारोपण के नाम पर केवल पौधों के थोड़े बहुत डंठल ही दिखाई दे रहे हैं।

पूर्व जिलाधिकारी ने बघौली से बम्हना खेड़ा तक मुख्य मार्ग के दोनों ओर पौधे लगवा कर सभी में ट्री-गार्ड लगवाया था, परंतु आज अधिकतर पौधे बिना ट्री-गार्ड के नजर आ रहे हैं, हजारों रुपए के कीमती ट्री-गार्ड धीरे-धीरे गायब हो रहे हैं। जिनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राजस्व विभाग द्वारा वृक्षारोपण के लिए सैकड़ों बीघा भूमि किसानों को वृक्षारोपण के लिए पट्टा की जाती है। जिनमें पौधे लगाने का प्रविधान है, परंतु वृक्षारोपण भूमि के पट्टाधारक अधिकांश किसान पौधारोपण के नाम पर फोटो खिंचवा कर खानापूर्ति करते है। उक्त भूमि पर यह लोग खेती कर फसल उगा रहे हैं। आखिर इस योजना से पर्यावरण को क्या फायदा है?

आम जनमानस ने कोविड-19 की दूसरी लहर के समय हुई ऑक्सीजन की किल्लत के बावुजूद भी इसके महत्व को नहीं समझा और इसीलिए पर्यावरण की रक्षा में अपनी जिम्मेदारी नहीं समझ रहे हैं।

क्षेत्रीय विकास जन आंदोलन के संयोजक रामखेलावन कनौजिया ने बताया सभी पौधों की स्थलीय जांच की आवश्यकता है। जिन लोग ने वृक्षारोपण के लिए पट्टा कराया है, वह भूमि पर पौधे न लगाकर खेती कर रहे हैं। उनके पट्टे खारिज होने चाहिए। पूरे प्रकरण पर उप जिलाधिकारी सण्डीला ने बताया मामले की जांच कर ठोस कार्यवाही की जाएगी।

रिपोर्ट – पी०डी० गुप्ता