
(प्रख्यात भाषाविद्-समीक्षक)
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
उत्तरप्रदेश के एक महत्त्वपूर्ण भाग ‘बुन्देलखण्ड’ की जीवन-शैली को अब ‘मुक्त मीडिया’ के माध्यम से सप्रमाण सामने लाने की आवश्यकता बन गयी है, क्योंकि वह महत्त्वपूर्ण भाग उत्तरप्रदेश के अन्तर्गत है, परन्तु उत्तरप्रदेश की सरकार की आँखें नहीं खुल रही हैं। चुनाव का समय आने पर घुटनों के बल सारे राजनेता वहाँ कई बार जाते हैं और ‘ढपोरशंखी’ आश्वासन देकर वहाँ की जनता के साथ क्रूर छल कर लौट आते हैं। यह घृणित और बीभत्स कृत्य वर्षों से किये जाते रहे हैं।
बुन्देलखण्ड के सभी लोग हमारे बन्धु-बान्धव हैं। वे दीर्घकाल से बुनियादी सुविधा-साधन से वंचित रखे जा रहे हैं और उत्तरप्रदेश के शासन-संचालक उधर से आँखें मूँदे हुए हैं।
इस विडम्बना को किस रूप में निरूपित किया जाये कि स्वयं को ‘योगी’ और ‘महाराज’ के रूप में प्रतिष्ठित करानेवाले उत्तरप्रदेश के वर्तमान मुख्यमन्त्री आदित्यनाथ योगी अपने राज्य से बाहर ‘पोस्टर ब्वॉय’ के रूप में जाकर वाहवाही लूटते हैं, परन्तु जिनकी कृपादृष्टि से वे मुख्यमन्त्री की गद्दी पर बैठे हुए हैं, उनके क्षेत्र में वे अब तक कितनी बार गये हैं। मेरा स्पष्ट संकेत है, अभावग्रस्त ‘बुन्देलखण्ड’ की जनता की ओर।
वहाँ ऐसे-ऐसे क्षेत्र हैं, जहाँ खाने के लिए अन्न नहीं है; पीने के लिए जल नहीं है। ऐसा भी नहीं कि उत्तरप्रदेश की सरकार इस नंगे सच को जानती नहीं है, परन्तु सरकार चलानेवाले मलाई खा रहे हैं और बुन्देलखण्ड की जनता दाने-दाने के लिए तरस रही है।
आख़िर उत्तरप्रदेश के सरकारी नेताओं को अक़्ल कब आयेगी?
(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, इलाहाबाद; ६ अप्रैल, २०१८ ई०)