कोथावाँ प्रा०वि० का हाल, बच्चों को दूध और फल नहीं दे रहे जिम्मेदार

अखण्ड भारत के सपने को पंख लगाता केवल उत्तर प्रदेश

जगन्नाथ शुक्ल✍ प्रतियोगी छात्र (इलाहाबाद)

 उत्तर प्रदेश भारत वर्ष का सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य है, सीमित संसाधनों के मध्य यहाँ की बहुसंख्य जनता जीवन-यापन करती है। वर्तमान में भारतवर्ष के अधिसंख्य राज्यों की भाँति उत्तर प्रदेश भी भाजपा शासित है, उ०प्र० की जनता भरण-पोषण के लिए लगभग सभी प्रदेशों में काम की वजह से निवास करती है, साथ ही स्थानीय समाज/व्यक्ति से प्रताड़ित भी होती है, कहीं भाषा के नाम पर तो कहीं ग़ैर प्रदेश के वासी के नाम पर; फिर भी लगभग पूरे भारत में आपको उत्तर प्रदेश मिलेगा।
अभी कल उ०प्र० की योगी कैबिनेट ने एक प्रस्ताव को अपनी स्वीकृति प्रदान की है कि अब उ०प्र० के बेसिक विद्यालयों में होने वाली भर्तियों में अन्य प्रान्तवासी अभ्यर्थी भी शामिल होंगे। इसके दोनों निहितार्थ निकलते हैं-सकारात्मक एवं नकारात्मक।
सकारात्मक दृष्टिकोण यह कहता है कि अब……..
१. उ०प्र० के नौनिहालों को सम्पूर्ण भारत के योग्य अध्यापकों से शिक्षण का लाभ मिलेगा और वह अधिकाधिक लाभान्वित होंगे।
२.दूर-दराज के शिक्षक अधिकांशतः विद्यालय में उपस्थित रहेंगे।
३.जब अन्य प्रान्त के लोग उत्तर प्रदेश में होंगे, तो उत्तर प्रदेश के मूल निवासी अन्य प्रदेशों में भी सुरक्षित होंगे।
नकारात्मक पक्ष-
१. इस सर्वाधिक जनसंख्या वाले  प्रदेश के बहुसंख्य योग्य अभ्यर्थी पूरी योग्यता के बाद भी सेवा से कोशों दूर हैं जो कि निरन्तर उन्हें तोड़ रहा है।
२.  प्राथमिक शिक्षा का मूल उदेश्य यह भी है कि बालक को स्थानीय भाषा में शिक्षा दी जाय, अब यह कैसे सम्भव होगा?
३. अब उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी का स्तर विस्फोटक होगा।
४.जब वर्तमान सत्तासीन दल केन्द्र सहित अधिसंख्य राज्यों में है तो एक साथ सभी राज्यों में ऐसे प्रस्ताव क्यों नहीं पारित किये जा रहे हैं?
वस्तुतः सारे कार्य पूरी तरह से राजनीतिक हैं , क्योंकि अब ४वर्ष तक उत्तर प्रदेश में चुनाव नहीं है और २०१९ में लोकसभा चुनाव प्रस्तावित हैं , उसी के मद्देनजर अन्य प्रान्तों को प्रसन्न करने का प्रयास किया जा रहा है।
क्या यही कार्य छत्तीसगढ़ में किया जा सकता है? जहाँ के युवा अन्य प्रान्तों का पुलिस भर्ती में खुला विरोध कर रहे हैं, शायद नहीं क्योंकि वहाँ चुनाव नजदीक हैं, झारखण्ड, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल आदिक राज्यों में किये जा सकते हैं, शायद नहीं, किन्तु उत्तर प्रदेश में ऐसा लागू करके क्या सन्देश देना चाहती है राज्य एवं केन्द्र सरकार ? यही कि अब उत्तर प्रदेश का युवा अपने राज्य में भी सुरक्षित नहीं है। क्या यही है भाजपा की ‘अखण्ड भारत’ की परिकल्पना? अगर यही है तो दुःखद है।