● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
आज (२० फ़रवरी) ‘टी-२० महिला-क्रिकेट-विश्वकप’ के सुपर लीग मे दक्षिणअफ़्रीका के ‘केबरे’ मैदान मे टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करते हुए, भारतीय महिला-दल का प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं था, कारण कि उपकप्तान स्मृति मन्धाना (५६ गेंदों मे ८७ रन) के अलावा अन्य कोई भी बल्लेबाज़ ठहरकर और आक्रामकता के साथ खेलने मे विफल रहीं। स्मृति मन्धाना के विकेट के गिरने के बाद भारतीय बल्लेबाज़ लुढ़कते-गिरते हुए, २० ओवरों के मैच मे ६ विकेटों पर कुल १५५ रन बना लिये थे। अचानक भारतीय दल पर वर्षा की कृपा ऐसी बरसी कि उसे ‘सेमीफ़ाइनल’ के दरवाज़े के भीतर प्रवेश करा दिया।
यह ग़नीमत रही कि ‘पॉवर-प्ले’ से पहले भारतीय दल का एक भी विकेट नहीं गिरा था; परन्तु स्मृति मन्धाना और शेफाली वर्मा (२४ रन) को अति साधारण कैच के रूप मे दो-दो बार जीवनदान मिले थे। दोनो के बीच ६२ रन की साझेदारी हुई थी। इस तरह देखा जाये तो स्मृति और शेफाली ने कोई विशेष प्रदर्शन नहीं किये। यदि दोनो के कैच लपक लिये गये रहते तो निश्चित रूप से भारतीय दल का कुल स्कोर ७५ रनो के ही आस-पास रहता।
ऋचा ‘फ्री-हिटर’ हैं। उनपर अपने स्वाभाविक प्रदर्शन से अलग हटकर प्रदर्शन करने का दबाव नहीं डालना चाहिए। जेमिमा रोड्रिग्ज़ एक कुशल बल्लेबाज़ हैं; परन्तु इस मैच मे खेलने के लिए उनके सामने कुछ ही गेंद रह गये थे। यही यदि जेमिमा (१९ रन) को पहले अथवा दूसरे विकेट के गिरने के बाद बल्लेबाज़ी करने के लिए भेजा गया रहता तो भारत का स्कोर १६० से पार पहुँच गया रहता। ऋचा घोष (० रन) गेंद के स्वभाव को बिना समझते हुए ही ऊपर की ओर शॉट मारकर अपना विकेट लुटा दिया। दीप्ति शर्मा (० रन) पहले ही गेंद पर दिशाहीन शॉट लगाकर कैच होकर चलते बनी। उनको छठे अथवा सातवें स्थान पर भेजा जाना चाहिए; क्योंकि उनकी बल्लेबाज़ी मे न तो विश्वास है और न ही गहराई। हरमीनप्रीत कौर (१४ रन) की बल्लेबाज़ी मे विश्वसनीयता का अभाव दिख रहा है।
शेफाली वर्मा को अभी अपनी बल्लेबाज़ी मे बहुत सुधार करना होगा; क्योंकि उन्हें ‘सही समय’ के साथ ‘सही दिशा’ मे शॉट लगाने के लिए जीतोड़ परिश्रम करना होगा।
ऑयरलैण्ड के बहुत कम अनुभववाली खिलाड़िनो ने ‘पॉवर प्ले’ मे दो विकेट गिरने के बाद भी अपने ‘रन-दर’ को गिरने नहीं दिया था और उसकी बल्लेबाज़ लगभग ७ रन प्रति ओवर के दर से रन बनाती रहीं। लुइस और डिलेनी ने सभी भारतीय गेंदबाज़ों की जमकर धुनायी की थी। रेनुका ठाकुर के अलावा सभी गेंदबाज़ अधूरी दिखी थीं।
ऑयरलैण्ड ने ८.२ ओवर मे २ विकेटों पर ५४ बना लिये थे तब अकस्मात् वर्षा होने लगी थी और खेल को रोक लिया गया था। उस समय भारतीय दल ऑयरलैण्ड-दल की तुलना मे ५ रनो से आगे था, जो ‘डकवर्थ लुइस’ नियम के अन्तर्गत भारतीय दल की जीत के साथ था। वर्षा रुकने का नाम नहीं ले रही थी, इसलिए निर्धारित समय पर ‘डकवर्थ लुइस’ के अन्तर्गत भारतीय दल को मात्र ५ रनो से जीत मिली है। इस तरह ४ मैचों मे ६ अंक प्राप्त कर, अब भारतीय दल सेमीफ़ाइनल मे पहुँच चुका है। इसके साथ ही भारतीय दल लगातार तीन बार सेमीफ़ाइनल मे पहुँचने की उपलब्धि अर्जित कर ली है।
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भारतीय प्रशिक्षकों की संदिग्ध दिखती भूमिका
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भारतीय प्रशिक्षकों को अभी बहुत परिश्रम करना है और खिलाड़िनो को कराना है, तभी भारतीय महिला-दल की खिलाड़िने बेहतर साबित होंगी और विश्वकप के फ़ाइनल मे पहुँचने मे सफल होंगी।
प्रशिक्षकों को खिलाड़िनो के ‘क्षेत्ररक्षण’ के समय इस ओर विशेष रूप से ध्यान करना होगा :―
१- सभी खिलाड़िनो के ‘थ्रो’ सटीक हों।
२- कैच करने का ज़बरदस्त अभ्यास हो।
३- ‘विकेट-टु-विकेट’ गेंदबाज़ी करने की क्षमता हो।
४- ‘वाइड बाल’ फेंकने से बचना होगा।
५- ‘नो बॉल’ बिलकुल नहीं फेंकना है।
६- तेज़ गेंदबाज़ को इन-कटर और आउट-कटर तथा यॉर्कर गेंद करने की बहुत अच्छी समझ हो और उनका प्रदर्शन भी प्रभावकारी हो।
७- स्पिनर गेंदबाज़ प्रभावविहीन दिख रही हैं। उनकी गेंदबाज़ी मे धार लाने की आवश्यकता है।
८- हरमनप्रीत कौर की कप्तानी सुधारी जाये। कब किस खिलाड़िन को खेलने और गेंद फेंकने के लिए बुलाना है, इस समझना होगा।
हरमनप्रीत कौर की समुचित दिशा मे कप्तानी नहीं हो रही है और बल्लेबाज़ी भी नहीं।
● प्रशिक्षकों को खिलाड़िनो को बल्लेबाज़ी करते समय अधोटंकित बिन्दुओं को समझाना और सिखाना होगा :―
१- ‘पॉवर प्ले’ (६×६=३६ गेंदों मे) मे अधिकतम ४ गेंदें ‘डॉट बाल’ हों।
२- एक रन को दो रनो और दो रनो को तीन रनो मे कैसे बदला जाये।
३- अधिकतर शॉट ज़मीन से लगा हुआ कैसे खेला जाये?
४- छक्के के लिए शॉट को ऊँचाई कम और लम्बाई अधिक देते हुए, कैसे खेला जाये?
५- साझेदारी बनाये रखने के लिए किस कला को विकसित करना होगा?
(सर्वाधिकार सुरक्षित― आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २० फ़रवरी, २०२३ ईसवी।)