प्रयागराज। ‘स्वराज विद्यापीठ’ और ‘अनन्त शिक्षा निकेतन’ के संयुक्त तत्त्वावधान मे प्रख्यात शिक्षाविद् एवं समाजसेवी डॉ० सुचेत गोइन्दी की जयन्ती १९ सितम्बर को स्वराज विद्यापीठ के सभागार मे मनायी गयी। आरम्भ मे, प्रथमा सिन्हा और अनिल कुमार ने सर्वधर्म प्रार्थना की, जबकि चन्दना घोष ने रबिन्द्र-संगीत की प्रस्तुति की।
दो सत्रोँ मे आयोजित कार्यक्रम के प्रथम सत्र मे व्याकरणवेत्ता एवं भाषाविज्ञानी आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने बताया– सुचेत जी जिजीविषा और जिगीषा से भरपूर थीँ। वे ज़बरदस्त हठधर्मी थीँ। एक बार ठान लेती थीँ तो पीछे नहीँ हटती थीँ। उन्होँने गाँवोँ मे रह रहीँ अभावग्रस्त बालिकाओँ को शिक्षित करने के लिए उनके माता-पिता को समझाकर एक अनुकरणीय और अनुसरणीय शैक्षिक वातावरण बनाया था।
चिन्तक-विचारक नरेश सहगल ने कहा– डॉ० सुचेत गोइन्दी जी एक कर्त्तव्यपरायण शिक्षाविद् और समाजसेविका थीँ। वे राग-द्वेष से परे रहकर अपना जीवन जीती थीँ। उनकी आचरणशीलता हर किसी को प्रेरित करती है। अध्यक्षता कर रहे शिक्षाविद् प्रो० रमाचरण त्रिपाठी ने कहा– सुचेत जी का पूरा परिवार ही स्वतन्त्रतासेनानी था। सुचेत जी ने शिक्षा और समाज के क्षेत्र मे जो कार्य किये हैँ, वे अद्वितीय हैँ। प्रो० त्रिपाठी ने कई प्रेरक संस्मरण भी सुनाये थे।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भूतपूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सतीश अग्रवाल ने अपने छात्रजीवन से सम्बन्धित संस्मरण सुनाते हुए वर्तमान शैक्षिक परिवेश पर कटाक्ष किया था।
द्वितीय सत्र ‘खुले आकाश की तलाश में’ के अन्तर्गत आयोजित काव्यसंध्या मे श्रीप्रकाश मिश्र, अजामिल, आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, हरीशचन्द्र पाण्डेय, सुधांशु मालवीय, चन्द्रविजय चतुर्वेदी तथा विवेक सत्यांशु ने अपनी-अपनी कविता का पाठ किया था।
समारोह का प्रभावकारी संचालन सरिता सरस्वती ने किया। आयोजन मे अनिल कुमार का विशेष सहयोग रहा।
इस अवसर पर अम्मा जी, संतोष गोइन्दी, शकुन्तला उपाध्याय, तनुजा मित्रा, शाहीन ख़ुश्बू, मानेन्द्र सिंह, चन्दांशु सिन्हा, नित्यानन्द सिंह इत्यादिक उपस्थित रहे।