अनोखी पहल : “आशीष और कल्याणी” के विवाह ने दिया सामाजिक जागरूकता का संदेश

February 27, 2026 0

शिवांकित तिवारी, जबलपुर, मध्यप्रदेश। जहाँ आजकल शादियाँ भव्यता और दिखावे का प्रतीक बन चुकी हैं, वहीं जबलपुर के युवा दंपति आशीष और कल्याणी ने अपने विवाह को सामाजिक जागरूकता का अभियान बना दिया। 5 फरवरी […]

शिवत्व की यात्रा मे मर्यादा, प्रेम और त्याग का अग्निसंस्कार

February 26, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– आश्रम में उस दिन एक गंभीरता थी। प्रभात की वायु में भी जैसे कोई गूढ़ संकेत था। निरंजन शिवालय के सामने बैठा था, पर आज उसका ध्यान स्थिर नहीं था। उसके […]

शिवत्व की यात्रा का अगला चरण : मौन-तप और वाणी की शुद्धि

February 25, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– श्रावण का अन्तिम सप्ताह बीत चुका था। आश्रम का वातावरण अब अधिक शांत था। वर्षा की रिमझिम ध्वनि, वृक्षों से टपकती जल-बूँदें और दूर बहती नदी का मधुर स्वर—सब मिलकर एक […]

शिवत्व की यात्रा का अगला चरण : भक्ति, ध्यान और ज्ञान की त्रिवेणी

February 24, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– आश्रम में उस दिन एक विशेष वातावरण था। श्रावण मास का अंतिम सोमवार था। प्रातःकाल से ही शिव-मंदिर में अभिषेक चल रहा था। जल, दुग्ध, बिल्वपत्र और मंत्रोच्चार से पूरा परिसर […]

शिवत्व की यात्रा का एक और चरण : आसक्ति से मुक्ति

February 23, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– प्रभात का समय था। आश्रम के पीछे बहने वाली छोटी नदी के तट पर निरंजन अकेला बैठा था। जल का प्रवाह शांत था, परन्तु उसके भीतर निरन्तर गति थी। वह उसी […]

शिवत्व की यात्रा : मौन का प्रकाश

February 22, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– प्रातःकाल का समय था। आकाश में हल्की लालिमा फैल रही थी। पूर्व दिशा में सूर्य अभी उगा नहीं था, परन्तु उसका संकेत धरती को जागृत कर चुका था। आश्रम के प्रांगण […]

शिव की महिमा : जन-मन मे शिवत्व का प्रस्फुटन

February 21, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– महाशिवरात्रि की उस साधना-रात्रि के पश्चात् गाँव का वातावरण जैसे दीर्घकाल तक उसी भाव में डूबा रहा। यह परिवर्तन क्षणिक उत्साह का परिणाम नहीं था; यह धीरे-धीरे लोकजीवन में उतरने लगा। […]

मनोहरा देवी ने सूर्यकान्त त्रिपाठी को ‘निराला’ बनाया था

February 20, 2026 0

निराला के जन्म-दिनांक (२१ फ़रवरी) पर विशेष प्रस्तुति ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• इलाहाबाद का नाम आते ही प्रथम पंक्ति मे जिस साहित्यिक अक्खड़ हस्ताक्षर का नाम-रूप दिखता है, वह सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ का है। […]

निराला को ‘खड़ी बोली’ का पाठ पढ़ाया था, मनोहरा देवी ने

February 20, 2026 0

निराला के जन्मदिनांक (२१ फ़रवरी) पर विशेष प्रस्तुति प्रयागराज। प्राय: देखा गया है कि पति को सन्मार्ग पर चलने के लिए पत्नी ही प्रेरित करती आयी है और उस पथ पर चलते हुए, वह पति […]

मनुजत्व से शिवत्व तक की अगली कड़ी : मन्त्र, मूर्ति और महातत्त्व

February 20, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव — दार्शनिक चर्चा ने गाँव की चेतना को गहरा किया था, पर अब एक नया प्रश्न उठने लगा— क्या यह समस्त साधना केवल आन्तरिक है, या इसके लिए परम्परागत उपासना की […]

शिवत्व का दार्शनिक आलोक

February 19, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वटवृक्ष के नीचे होने वाली मौन-साधना ने गाँव के जीवन को केवल सामाजिक नहीं, दार्शनिक आयाम भी प्रदान कर दिया था। अब प्रश्न केवल व्यवहार के नहीं रहे; वे अस्तित्व के […]

शिवत्व की अन्तर्यात्रा का ताण्डव

February 18, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव-– गाँव में बाहरी व्यवस्था के साथ समन्वय स्थापित हो जाने के बाद जीवन पुनः अपनी सहज गति में लौट आया, किन्तु भीतर कुछ ऐसा था जो अब पहले जैसा नहीं रहा। […]

सत्ता और चेतना का संघर्ष

February 16, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– चेतना का प्रसार जितना शांत दिखाई देता है, उसका प्रभाव उतना ही व्यापक होता है। गाँवों में उभर रही नई पद्धति—जहाँ निर्णय सामूहिक होते थे, जहाँ न्याय करुणा के साथ संतुलित […]

परम्परा और परिवर्तन का संगम

February 15, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– गाँव के मध्य स्थित वह विशाल वटवृक्ष अब केवल छाया का स्थान नहीं रहा था; वह सामूहिक चेतना का केन्द्र बन चुका था। उसकी जटाओं की भाँति गाँव के लोगों के […]

राष्ट्रीय पर्वों को मुँह चिढ़ाता वैलेंटाइन डे

February 14, 2026 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’– फरवरी महीने का दूसरा सप्ताह प्रेमियों के लिए होली, दीपावली और ईद से भी कहीं बढ़कर होता है। तरह-तरह के पक्षियों का दाने की तलाश में उड़ान भरते नजर आना मामूली […]

दुःख हमे ढूँढ़ते हैं

February 13, 2026 0

मै ख़ुशियाँ ढूँढ़ता हूँ हर ओर, मगर दुःख हमे ढूँढ़ते हैं। मै भलाई करता हूँ राघव, लोग कमियाँ ढूँढ़ते हैं। हमे नारियल समझकर लोग, तोड़ते और फोड़ते हैं। बड़ी उलझन मे हूँ आजकल, रिश्ते बनने […]

सुरक्षित माइग्रेशन को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम कर रहे विदेश मंत्रालय और आईओएम

February 13, 2026 0

नई दिल्ली। भारत का विदेश मंत्रालय और इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (आईओएम) सुरक्षित एवं व्यवस्थित प्रवासन को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। इस दिशा में आगे बढ़ते हुए विदेश मंत्रालय ने […]

शिवत्त्व : प्रकाश-तत्त्व और चेतना का सनातन सूत्र

February 10, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– शिव न किसी एक रूप, मूर्ति या कल्पना तक सीमित हैं। शिव तत्त्व हैं—अविनाशी, अव्यक्त और सर्वव्यापक।वेद उद्घोष करते हैं— “एको देवः सर्वभूतेषु गूढःसर्वव्यापी सर्वभूतान्तरात्मा।”(श्वेताश्वतर उपनिषद् 6.11) शिव वही एक देव […]

पत्रकारिता क्षेत्र मे नयी पहल : पत्रकार प्रेस परिषद ने लागू किया ड्रेस कोड, पदाधिकारियों को ₹3 लाख का बीमा व नियुक्ति पत्र दिये

February 9, 2026 0

लखनऊ। पत्रकारिता जगत में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए पत्रकार प्रेस परिषद ने भारत में पहली बार अपने संगठन में अनिवार्य ड्रेस कोड लागू कर पत्रकारों को एक नई और सशक्त पहचान दी है। परिषद […]

विद्या परमं धनम् : भारतीय शास्त्रीय परम्परा में ज्ञान, साधना और लोकहित का दर्शन

February 8, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– “विद्या परमं धनम्।” — यह केवल एक सूक्ति नहीं, अपितु भारतीय सभ्यता की आत्मा है। मानव इतिहास में यदि किसी संस्कृति ने ज्ञान को सत्ता, संपत्ति और सामर्थ्य से ऊपर स्थान […]

मेघनाद वध : रावण की निश्चित हार का प्रमाण

February 7, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– लंका अब केवल नगर नहीं थी—वह एक भय-शाला बन चुकी थी। रावण ने सभा में कहा—“अब मेरा पुत्र जाएगा।” इंद्रजीत। जिसने कभी पराजय नहीं देखी थी।जिसके अस्त्र देवताओं को भी चकित […]

“भारत के भाग्य का निर्णय स्वराजभवन मे करो; मेरे सामने करो”– पं० मोतीलाल नेहरू

February 6, 2026 0

पं० मोतीलाल नेहरू की पुण्यतिथि (६ फ़रवरी) की स्मृति मे ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••• समय व्यतीत होता रहा। अँगरेज़-शासन और प्रशासन ने पं० मोतीलाल नेहरू के विरोधी दृष्टिकोण को भाँप लिया था; फलस्वरूप उन्हेँ […]

सेतुसमुद्रम : धर्म पहले संवाद करता है और युद्ध बाद में

February 5, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– समुद्र सामने था—अथाह, गंभीर और चुनौतीपूर्ण। यह वही समुद्र थाजो रावण के अहंकार की सीमा बन चुका था। वानर सेना ठिठकी नहीं,पर प्रश्न था—“कैसे?” राम मौन थे। विभीषण ने सागर से […]

लंका की गर्दन पर अंगद का पैर

February 4, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– हनुमान लौट आए थे। समुद्र के उस पार से नहीं,बल्कि एक नए युग की घोषणा लेकर। उन्होंने जो देखा था,जो किया था—वह केवल कथा नहीं थी,वह प्रमाण था। वानर सेना पहले […]

प्रेम सभी भावों मे सबसे पावन और महान है

February 3, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– प्रेम सभी भावों में सबसे पावन और महान है।प्रेम बिना जग सूना है और जीवन वीरान है।मन, विचार और हृदय मे गहरे तक है प्रेम बसा।प्रेम नित्य और ईश्वर है इसकी […]

रावण के आतंक का अन्त

February 3, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– हनुमानजी ने लंका को पहली बार देखा तो ठिठक गए। यह वैसी नहीं थी जैसी कथाओं में कही गई थी।यह केवल भय की नगरी नहीं थी—यह वैभव की नगरी थी। स्वर्ण-प्रासाद, […]

जातिवादिता के फुँफकारते फन को ही सरकार क्योँ नहीँ कुचल देती?– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

February 2, 2026 0

प्रयागराज। इन दिनो देश के शिक्षालय-परिसर मे एक ही बात की अनुगूँज सुनायी पड़ रही है, जोकि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यू० जी० सी०– युनिवर्सिटी ग्राण्ट कमीशन) की ओर से विगत १५ जनवरी को लागू की […]

रामायण : रावण-निर्मित भय का उन्मूलन

February 1, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रावण को किसी ने देखा नहीं था—फिर भी सबने उसे देखा हुआ मान लिया था। किष्किंधा से दक्षिण की ओर बढ़ते वानर-दल के पाँव दृढ़ थे,पर मन अनिश्चित। वन बदलते जा […]