बड़े राजनीतिक ब्रांड और संविधान निर्माता भीमराव आंबेडकर की मनाई गई जयंती

हरदोई में संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ भीमराव रामजी आंबेडकर जयंती धूमधाम से मनाई गयी और उनकी जयंती पर जिले भर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।हालांकि यह कार्यक्रम हर साल मनाया जाता रहा है लेकिन इस साल बाबा साहब भीमराव रामजी आंबेडकर की जयंती कई मायनों में खास रही जिसके चलते बाबा साहब अब सभी दलों के सबसे बड़े राजनीतिक ब्रांड बन गए और उसी के चलते सभी दलों ने विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये और उन कार्यक्रम में बढ़चढ़ कर हिस्सा भी लिया।शहर के सोल्जर बोर्ड चौराहे से छात्रों ने झांकियां निकाली और झाड़ू लगाकर स्वक्षता का भी सन्देश दिया।

जयंती के अवसर पर मूर्तियों पर डॉ अंबेडकर की तस्वीर पर माला पहनाकर श्रद्धासुमन अर्पित किये गए और वक्ताओं द्वारा कहा गया कि डॉ अंबेडकर जातिवाद, संप्रदायवाद और भ्रष्टाचार जैसी कुरीति को विकास के मार्ग में सबसे बड़ा अवरोधक मानते थे। कहाकि जब संविधान का निर्माण हो रहा था, उसके पीछे एक चिंतन, दृष्टि और स्वप्न था। लेकिन आज का समाज संक्रमनकालीन व्यवस्था से गुजर रहा है। इस स्थिति में बाबा साहेब के विचारों को आम्तसात करना प्रासंगिक होगा।वक्ताओं ने कहा कि बाबा साहेब महान विभूति थे और प्रखर विचारक थे एक महान चिंतक, विचारक, सुधारक के रूप में उनकी स्मृतियां हमेशा जीवंत रहेगी।

बतादें कि भारत के लोगों के लिये डॉ भीमराव अंबेडकर का जन्म दिवस और उनके योगदान को याद करने के लिये 14 अप्रैल को एक उत्सव से कहीं ज्यादा उत्साह के साथ लोगों के द्वारा अंबेडकर जयंती को मनाया जाता है ये भारत के लोगों के लिये एक बड़ा क्षण था जब वर्ष 1891 में उनका जन्म हुआ था।

बतादें कि इस साल बाबा साहब भीमराव आंबेडकर की जयंती कई मायनों में खास रही बाबा साहब अब सभी दलों के सबसे बड़े राजनीतिक ब्रैंड बन गए हैं। अगले साल होने वाले आम चुनाव को देखते हुए सभी दल दलितों के मसीहा आंबेडकर की 127वीं जयंती के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहते थे।यही कारण रहा कि चुनाव में दलित वोट बैंक पर अपना दावा मजबूत करने के लिए सभी दल आंबेडकर जयंती के जरिए खुद को दलितों का मसीहा बताने में लगे रहे।एससी-एसटी ऐक्ट में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ भारत बंद में दलित संगठनों ने जिस तरह विरोध-प्रदर्शन किया उसके बाद से सभी पार्टियां इस आबादी को अपनी तरफ लुभाने के लिए लगी हुई है।इस बार मूर्तियों की सुरक्षा व्यबस्था भी तगड़ी रही और पुलिस चप्पे चप्पे पर निगाहें लगाई रही वही आला अधिकारी भी पल पल की जानकारी लेते रहे।