हरदोई- सण्डीला कस्बे के सैकड़ों वर्ष प्राचीन पौराणिक और धार्मिक महत्व वाले श्री महावीर झंडे मेले में आस्था का सैलाब देखने को मिला। भाद्रपद के आख़री मंगल को निकलने वाले महावीर झंडों के जुलूस में आसपास के जनपद ही नहीं कई प्रदेशों के भी झंडे शामिल हुए।
सण्डीला कस्बे में निकलने वाली महावीर झंडों की शोभा यात्रा से पहले सुबह शीतला मन्दिर स्थित सिद्धपीठ हनुमान मंदिर में पूजा अर्चना हुई। जिसके बाद दोपहर करीब 1 बजे झंडों की शोभा यात्रा शुरू हुई जो शोरा कोठी होते हुए मुरारेश्वर मन्दिर पहुंचा। जहां करीब 1 घण्टे विश्राम के बाद पुलिस चौकी से होकर गुदड़ी, रानी जी का शिवाला दरगाह रोड होते हुए छोटे चौराहे से शाम लगभग 6 बजे इम्लियाबाग पहुंचा जहां आसपास गांव के झंडे और दर्जनों झांकियों के साथ नगर के मुख्य मार्ग पर विशाल शोभा यात्रा निकाली गयी।
काफी पुराना है मेले का इतिहास
बताया जाता है कि करीब 150 वर्ष पहले अंग्रेजो ने इस मंदिर पर लगने वाली भीड़ को रोका तो आस्था के नाम पर जिले भर के तमाम लोग इकठ्ठा हुए और सड़को पर हनुमान जी का झंडा लेकर घरो से निकल पड़े हिन्दुओ की आस्था पर प्रहार होते देख मुस्लिम समुदाय भी उनके साथ उत्तर आया।सड़को पर भीड़ इतनी जयादा हो गयी की अंग्रेजो को सम्भालना मुस्किल हो गया। हिन्दुओ ने अपनी आस्था से इसे जोड़ा तो स्थानीय मुस्लिमो ने उनकी भरपूर मदद की मेले मे आने वाले लोगो को उनके ठहरने का इंतजाम और चंदे की व्यबस्था मुस्लिम समाज के लोगो ने किया। जिसके बाद से आज तक लोग इस परंपरा का निर्वहन करते चले आ रहे है। हनुमान जी के इस मंदिर में प्रत्येक वर्ष मेले के दिन लाखो श्रद्धालु झंडे लेकर आते है और झंडा चढ़ाते है लोगो का मानना है की यहाँ उनकी मुरादें पूरी होती है।
गंगा जमुनी तहज़ीब की मिसाल भी मिली
देश में राजनैतिक दल अपने स्वार्थ के लिए धर्म जाती के आधार पर भले ही एक दुसरे को लड़ाने से गुरेज नहीं करते। मगर संडीला की सरजमीं पर लगने वाला ये धार्मिक मेला कौमी एकता की अनूठी मिसाल है। झंडों की शोभा यात्रा के दौरान मुस्लिम समुदाय ने कई जगह शोभा यात्रा का गर्मजोशी से स्वागत किया।