डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’
हमारे प्रिय नेताजी छीन-झपट कर बैठे
न सुधरे जनता से छल-कपट कर बैठे ।
सड़कें ख़राब थी बिजली भी नहीं आती
हम बिजली के बटन चट-पट कर बैठे ।
दिमाग़ आज हमारा बहुत ख़राब हुआ
घर पर हम पत्नी से खट-पट कर बैठे ।
अब बदला लेने की ठान ली थी इसलिए
बाक़ी सारा काम ख़त्म झट-पट कर बैठे ।
जैसे ही रास्ते में मिले हमारे प्रिय नेताजी
टकले पे ‘राहत’ चप्पल पटा-पट कर बैठे ।