कविता : ऐ माटी के दीपक धरा रोशन कर दे

कवि राजेश पुरोहित, भवानीमंडी


तिमिर को जीत कर आलोक कर दे।
ऐ माटी के दीपक धरा रोशन कर दे।।

तू तूफानों से घबराया न कभी भी रे।
तू अज्ञान को अंतर्मन से दूर कर दे।।

खिला दे रोशनी में मुरझे चेहरों को।
तू खिलखिलाता अब चेहरा कर दे।।

उदास है जो युवा खोए खोए से हैं।
उनकी ज़िंदगी मे अब उजाले कर दे।।

तेरी रोशनी में पतंगे दौड़े चले आते।
उन पतंगों के परों में जरा जान भर दें।।

उजालों की सबको चाह है यहाँ बेशक।
तू अमावस को भी धवल निशा कर दे।।

जो बड़ी आस कर हाथों में तुम्हें थामें।
उन हाथों की लकीरों को रोशन कर दें।।