कोरोना की भयावह स्थिति के लिए ‘नरेन्द्र मोदी’ ही उत्तरदायी

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

नरेन्द्र मोदी देशवासियों को कोरोना की धधकती आग के हवाले कर चुनावी राजनीति को प्राथमिकता देता रहा, जबकि उसे सर्वदलीय बैठक बुलाकर सभी चुनाव स्थगित करा देने चाहिए थे; परन्तु सत्ता-लोलुप इस निहायत घृणित प्रधानमन्त्री ने अपने मन्त्रिमण्डल के समस्त मन्त्रियों को चुनाव-अभियान में लगवा दिया था। कोरोना अपना पंजा फैला चुका था और नरेन्द्र मोदी नामक नृशंस नेता अपने लाव-लश्कर के साथ बंगाल, असोम, तमिलनाडु, केरल तथा पुड्डुचेरि घूमता रहा और चुनावी सभाओं में अपनी आदत के मुताबिक ज़ह्र उगलता रहा। उसका घिनौना गृहमन्त्री अमित शाह ‘रोड-शो’ में व्यस्त रहा। उसके दल का उत्तरप्रदेश का मुख्यमन्त्री आदित्यनाथ ‘प्ले ब्वॉय’ और ‘पोस्टर ब्वॉय’ की राजनैतिक भूमिका अदा करता रहा। इतना ही नहीं, कोरोना की भयावहता के बीच पंचायत-चुनाव कराये जा रहे हैं। क्या नरेन्द्र मोदी चुनावों को रोकवा नहीं सकता था?

क्या यही किसी देश के प्रधानमन्त्री का चरित्र है? उसी नरेन्द्र मोदी की निष्क्रियता का परिणाम है कि आज पल-पल प्रत्येक राज्य में सैकड़ों देशवासी मरते जा रहे हैं; स्वजन की साँस बचाने के लिए उनके अपने हस्पताल और ज़िला-प्रशासन के सामने गिड़गिड़ा रहे हैं कि उन्हें सम्बन्धित सुई मिल सके। सुई की कालाबाज़ारी चरम पर है और सरकारों की ‘हेल्प लाइन’ निष्क्रिय दिख रही हैं।

देश के किसी भी हस्पताल में न तो समुचित उपचार-व्यवस्था है; न ही रोगियों के लिए बिस्तर, प्राणरक्षक गैस, दवा, वेण्टिलेटर हैं और न ही पर्याप्त चिकित्सक, स्वास्थ्यसेवक-सेविकाएँ हैं।

नरेन्द्र मोदी यदि चाहता तो सर्वदलीय बैठक बुलवाकर, चिकित्सकों और विज्ञानियों के साथ मिल-बैठकर देशवासियों के जीवन बचाने के प्रति जागरूक रहता; किन्तु नितान्त अहंकारी उस व्यक्ति ने जब से सत्ता सँभाली है तब से उसके पाँव ज़मीं पर ठहरते दिख ही नहीं रहे हैं। यदि नरेन्द्र मोदी यह समझता है कि वह सर्वशक्तिमान् है तो यह उसकी सबसे बड़ी भूल है। उसका एकमात्र उद्देश्य है, देश के प्रत्येक राज्य में हमारी ही सरकार दिखे।

अब, जब प्रतिदिन-प्रतिरात्रि प्रतिपल सैकड़ों भारतवासी मृतक के रूप में अपने-अपने मान्यतानुसार श्मशानघाट में जलाये जा रहे हैं और क़ब्रिस्तान में दफ़्न किये जा रहे हैं। उसके लिए भी स्वजन को शव पाने के लिए प्रतीक्षासूची बनायी गयी है। कितना हृदय-विदारक परिदृश्य है!

नरेन्द्र मोदी! देशवासियों के मरते स्वजन और उनके अपनों के क्रन्दन-निकलती आह तुम्हें चैन से जीने नहीं देंगी।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १६ अप्रैल, २०२१ ईसवी।)