लखनऊ। अहिंसा के अवतार, भगवान महावीर की जयंती राजधानी में श्रद्धा के साथ मनाई गई। इसी क्रम में डालीगंज के प्रतिष्ठित श्री मनकामेश्वर मन्दिर मठ की श्रीमहंत देव्या गिरि के अगुआई मे डालीगंज के महावीर पार्क में भगवान महावीर को श्रद्धासुमन अर्पित किये गये।
श्रीमहंत देव्या गिरि ने महावीर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया, अंगवस्त्र भेंट किया। बाद 51 दीपक रोशन किये गये। बाद में प्रसाद वितरण हुआ। श्रीमहंत देव्या गिरि ने बताया कि कोरोना के चलते सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पालन करते हुये कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
इस मौके पर अपने विचार व्यक्त करते हुये महंत देव्या गिरि ने कहा कि जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का जीवन ही उनका संदेश है। तीर्थंकर महावीर स्वामी ने अहिंसा को सबसे उच्चतम नैतिक गुण बताया। उन्होंने दुनिया को जैन धर्म के पंचशील सिद्धांत बताएं- अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, अचैर्य और ब्रह्मचर्य।
उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने अपने उपदेशों और प्रवचनों के माध्यम से दुनिया को सही राह दिखाई और मार्गदर्शन किया। महावीर ने अहिंसा की जितनी सूक्ष्म व्याख्या की। वह अन्य कही दुर्लभ हैं। उन्होंने मानव को मानव के प्रति प्रेम और मित्रता से रहने का संदेश ही नही बल्कि मिट्टी, पानी, अग्नि, वायु, वनस्पति से लेकर कीड़े मकोड़े पशु-पक्षी आदि के प्रति भी मित्रता और अहिंसक विचार के साथ रहने का उपदेश दिया।
इस मौके पर उपमा पाण्डेय, कल्याणी गिरि, नीतू शर्मा, विमल सिंह, विजय मिश्रा, विश्वजीत, मन्नू मौजूद रहे।