अरुणाचलप्रदेश में चीन की घुसपैठ जारी; मोदी-सरकार अब भी बेहोश!

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

‘न्यू इण्डिया की मोदी-सरकार’ कहती है– हम चीन को एक इंच ज़मीन लेने नहीं देंगे; किन्तु उसी चीन ने भारत की सीमा में घुसकर साढ़े चार सौ किलोमीटर का क्षेत्र अपने अधिकार में कर लिया है। प्रमुख विपक्षी दल के नेता राहुल गांधी लगातार मोदी-सरकार से पूछते रहे कि चीन भारत की सीमा में कैसे घुसता चला आ रहा है तब इस पर स्वयं को देश का चौकीदार कहनेवाला व्यक्ति, जो अब ‘न्यू इण्डिया’ का प्रधानमन्त्री है, बता नहीं सका या फिर बताना नहीं चाहता था।

हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका के सामरिक संघटन ‘नाटो’/’नैटो’– नॉर्थ एटलाण्टिक ट्रीटी ऑर्गनाइज़ेशन’ (उत्तरी एटलाण्टिक सन्धि संघटन) ने एक विवरण सार्वजनिक किया है, जिसके अन्तर्गत चीनी सेना ने भारत के राज्य ‘अरुणाचलप्रदेश’ में, जहाँ पर ‘वास्तविक नियन्त्रण-रेखा’ है और चीन की नदी ‘सोसी’ है, उसके भीतर साढ़े चार सौ किलोमीटर की दूरी तक सौ से भी अधिक घर का निर्माण कर लिये हैं, जो कि ‘गाँवनुमा’ दिख रहा है। अन्तरराष्ट्रीय सीमा-रेखा ‘मैकमोहन रेखा’ भी उसी के पास स्थित है।

ऐसा नहीं कि उक्त प्रकार की भारत-विरोधी चीनी उपक्रम का संज्ञान कथित मोदी-सरकार को नहीं है। ‘नाटो’ की इस सप्रमाण विवरण को ‘न्यू इण्डिया की मोदी-सरकार न तो अस्वीकार कर पा रही है और न ही कोई चीन के विरुद्ध कोई सामरिक नीति बना पा रही है। भारत के थलसेनाध्यक्ष तक भी यह सूचना पहुँच चुकी है; परन्तु कहीं से कोई प्रतिक्रिया नहीं की जा रही है।
हमें नहीं भूलना चाहिए कि पिछले कुछ महीनों में चीनी सेना ने लद्दाख और उत्तराखण्ड में भी घुसपैठ बना ली थी। न्यू इण्डिया की मोदी-सरकार की चुप्पी का ही परिणाम था कि चीनी सैनिकों ने हमारे २० बहादुर सैनिकों की हत्या कर दी थी और कथित मोदी-सरकार और उसके अधीनस्थ सैन्य अधिकारी हमारे जाँबाज़ सैनिकों की हत्या को बहुत समय तक झुठलाते रहे।
उल्लेखनीय है कि मोदी-सरकार और उसके नियन्त्रण में काम करनेवाले सैन्य अधिकारी चीनी सामरिक नीति को समझने में सफल दिख नहीं रहे हैं, अन्यथा दशकों से चला आ रहा ‘भारत-चीनसीमा-विवाद’ लगातार ख़तरनाक स्थिति में दिख नहीं रहा होता। चीन की मंशा साफ़ है; वह छोटे-छोटे-स्तर पर भारत की सीमाओं के भीतर बेहद चतुराई के साथ घुसपैठ करता आ रहा है; वह एक प्रकार से भारत के भीतर अपना उपनिवेश बनाने में लगा हुआ है, जो आरम्भ में एक सामान्य निर्माण-सा दिखेगा; परन्तु उसके पीछे चीन बहुत ही ख़तरनाक खेल खेलना चाहता है। वह अवसर पाते ही अरुणाचलप्रदेश के भीतर लगभग साढ़े चार सौ किलोमीटर की दूरी तक अपना सामरिक साम्राज्य स्थापित करने में लगा है। जब तक मोदी-सरकार और पूरी तरह से उसके अधीन दिख रहे सैन्य अधिकारियों की आँखें खुलेंगी तब तक बहुत देर हो चुकी रहेगी। दूसरी ओर,’मोदी-सरकार’ अपनी विदेश और रक्षा नीतियों को उन्नत बनाने के बजाय केवल ‘सत्ता की राजनीति’ करती आ रही है, जिसके कारण भारत की अनेक सीमाएँ असुरक्षित जान पड़ती हैं।

चीन में हाल ही में एक ऐसा क़ानून बनाया गया है, जिसके अन्तर्गत यह प्रविधान है कि चीन यदि कोई भूभाग अधिग्रहण कर लेता है तो उसे किसी भी मूल्य पर छोड़ेगा नहीं।

सर्वाधिक महत्त्व का विषय यह है कि चीन में एक व्यक्ति ऐसा है, जो कि सभी निर्णय स्वयं करता है, जबकि ‘न्यू इण्डिया’ में ऐसा कुछ नहीं :– कहीं अमित शाह दिखते हैं; कहीं अजीत डोभाल; कहीं ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ तो कहीं ‘विश्व हिन्दू परिषद्’ के प्रवक्ता दिखते हैं। वे सभी मात्र गरजना जानते हैं। यही कारण है कि चीन कथित मोदी-सरकार की नस-नस से वाक़िफ़ हो चुका है। वह जान चुका है कि सत्ता के भूखे लोग चीन की कूटनीतिक बारीक़ियों की परछाईं तक को छू नहीं सकते। इतना ही नहीं, तुलना-स्तर पर भारत की सामरिक शक्ति प्रत्येक दृष्टि से चीन की अपेक्षा बहुत कम है।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ८ नवम्बर, २०२१ ईसवी।)
नवम्बर, २०१९ ईसवी